scorecardresearch
Tuesday, 31 March, 2026
होमदेशजम्मू कश्मीर: खामेनेई की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शनों में 14 लोग घायल

जम्मू कश्मीर: खामेनेई की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शनों में 14 लोग घायल

Text Size:

श्रीनगर, दो मार्च (भाषा) अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू कश्मीर में प्रदर्शनों के दूसरे दिन कम से कम 14 लोग घायल हो गए, जिनमें छह सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने एहतियाती उपायों के तहत केंद्र शासित प्रदेश में लोगों की आवाजाही पर अंकुश लगाने, शिक्षण संस्थानों को बंद करने और मोबाइल इंटरनेट की गति धीमी करने के लिए प्रतिबंध लागू किए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर घाटी में विभिन्न स्थानों पर 75 रैलियां आयोजित की गईं, जबकि जम्मू क्षेत्र में भी कुछ प्रदर्शन हुए। कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

श्रीनगर शहर के बेमिना, गुंड हसीभात, सैदाकदल, निगीन, फोरशोर रोड और जहांगीर चौक इलाकों में, दक्षिण कश्मीर के पुलवामा शहर में और मध्य कश्मीर के बड़गाम में विरोध प्रदर्शन हुए। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शिया आबादी रहती है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर मार्च किया और अमेरिका व इजराइल विरोधी नारे लगाए।

अधिकारियों ने बताया कि हालांकि अधिकांश विरोध प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर झड़पें हुईं, जिसके कारण सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी में हुई इन झड़पों के दौरान 14 लोग घायल हुए, जिनमें आठ प्रदर्शनकारी और छह सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।

कश्मीर के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गईं। ये प्रतिबंध मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा दिए गए एक दिवसीय हड़ताल के आह्वान के मद्देनजर लगाए गए थे।

उन्होंने लोगों से ‘एकता, गरिमा और शांति’ के साथ हड़ताल करने का आग्रह किया था।

अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित घंटा घर को चारों ओर बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों के जमावड़े को रोकने के लिए शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया था।

उन्होंने कहा कि शहर में प्रवेश करने वाले महत्वपूर्ण चौराहों पर कंटीले तार और बैरिकेड लगाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किए गए एहतियाती उपाय थे।

अधिकारियों ने छात्रों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर सभी शिक्षण संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद कर दिया। कश्मीर घाटी के अन्य जिलों के शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई गईं। पूरे कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट की गति भी धीमी कर दी गई।

एमएमयू की हड़ताल की अपील को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिला।

मुफ्ती ने कहा, ‘ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक द्वारा किए गए बंद के आह्वान के प्रति हम अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता व्यक्त करते हैं। यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय संपूर्ण मुस्लिम समुदाय और सत्य के लिए खड़े सभी लोगों को आहत करता है।’

पुलिस ने परामर्श जारी कर सभी मीडिया संगठनों और समाचार मंचों से खबरों में उच्चतम स्तर की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया है।

परामर्श में कहा गया है, ‘कृपया अपुष्ट जानकारी, अटकलों या अफवाहों को प्रकाशित करने से बचें; सुनिश्चित करें कि सभी खबरों को प्रसारित करने से पहले विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों के माध्यम से पुष्टि की गई हो। अनावश्यक दहशत पैदा करने वाली सनसनीखेज सुर्खियों से बचें।’

भाषा

शुभम अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments