scorecardresearch
Monday, 2 March, 2026
होमफीचरपंजाब की हवेली दीवान हरि चंद का होगा रेस्टोरेशन—यह जगह गुरबानी संगीत के लिए समर्पित होगी

पंजाब की हवेली दीवान हरि चंद का होगा रेस्टोरेशन—यह जगह गुरबानी संगीत के लिए समर्पित होगी

आनंद फाउंडेशन के भाई बलदीप सिंह ने कहा, यह समझौता किसी सुंदर पुरानी हवेली को किराये पर देने के लिए नहीं है. वह कपूरथला की इस हवेली को खत्म हो रही संगीत परंपराओं का घर बनाना चाहते हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: पंजाब के कपूरथला में बनी 19वीं सदी की हवेली दीवान हरि चंद को अब एक विरासत केंद्र के रूप में फिर से तैयार किया जाएगा. यहां पुरानी पांडुलिपियां, मौखिक इतिहास और गुरबानी संगीत को सुरक्षित रखा जाएगा. हवेली के मालिकों ने आनंद फाउंडेशन के साथ 30 साल का समझौता किया है, ताकि इस जगह को एक जीवित विरासत केंद्र बनाया जा सके.

यह साझेदारी खास है क्योंकि आजकल कई पुरानी इमारतों को लग्जरी होटल बना दिया जाता है, लेकिन इस समझौते में साफ कहा गया है कि यह हवेली पर्यटन या कमाई के लिए इस्तेमाल नहीं होगी.

यहां लुप्त हो रही दक्षिण एशियाई संगीत परंपराओं, खासकर गुरबानी संगीत के कार्यक्रम होंगे. साथ ही वाद्ययंत्र बनाने और ठीक करने का काम, पांडुलिपियों और रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने का काम, शोध, कार्यशालाएं और पढ़ाई की व्यवस्था भी होगी.

एक और योजना आनंद आफ्टर-स्कूल स्टडी प्रोग्राम है. इसमें सेवानिवृत्त शिक्षक बच्चों को भाषा, मानविकी विषय, सही सोचने का तरीका और विरासत बचाने की शिक्षा देंगे. बलदीप सिंह ने इसे “पुरानी इमारत में बना आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम” कहा.

सिर्फ कमाई के लिए नहीं

कपूरथला के शालीमार बाग रोड पर स्थित यह हवेली लगभग 1860 में दीवान हरि चंद के लिए बनाई गई थी. वह कपूरथला रियासत के बड़े अधिकारी थे. इसी हवेली में 1872 में सर जगतजीत सिंह का जन्म हुआ था, जो आगे चलकर कपूरथला के महाराजा बने. यह हवेली शहर की सबसे पुरानी हवेली मानी जाती है और लगभग 2,983 वर्ग फुट में फैली है.

भाई बलदीप सिंह ने कहा, “यह समझौता किसी सुंदर पुराने घर को किराये पर देने के लिए नहीं है. हमारा मकसद है कि इस ऐतिहासिक इमारत को उसकी पुरानी शैली में ठीक किया जाए और इसे संगीत, पढ़ाई और शोध का सक्रिय केंद्र बनाया जाए, न कि इसे सजाकर पर्यटन के लिए बेच दिया जाए.”

मालिक परिवार की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजीव चोपड़ा ने कहा कि वह इस हवेली को पुस्तकालय या शिक्षा केंद्र बनाना चाहते थे. उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता था कि यह घर सिर्फ एक और व्यावसायिक संपत्ति बन जाए.”

समझौते के अनुसार, आनंद फाउंडेशन अगले 30 साल तक इस हवेली की मरम्मत और देखभाल के लिए धन जुटाएगा और इसका रोजाना प्रबंधन करेगा. हवेली का मालिकाना हक चोपड़ा परिवार के पास ही रहेगा.

केबीएस सिद्धू ने कहा कि यह काम रिटायरमेंट के बाद का शौक नहीं है, बल्कि संस्कृति और समाज के लिए किए गए लंबे काम का एक और कदम है, जो अब इस ऐतिहासिक जगह से जुड़ गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments