देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित होली मिलन समारोह में भाग लिया. इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की.
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “7 मार्च को उत्तराखंड में हमारी सरकार के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे. इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री भी शामिल होंगे.”
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि होली केवल रंगों और आनंद का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है. उन्होंने कहा कि खुशियों और उत्साह के माहौल में मनाया जाने वाला यह पर्व सामाजिक समरसता और एकता की भावना को मजबूत करता है.
रविवार को भी मुख्यमंत्री ने काशीपुर नगर निगम परिसर में आयोजित रंगोत्सव होली मिलन समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने पारंपरिक कुमाऊंनी होली, शास्त्रीय होली गीतों और भजनों का आनंद लिया और लोगों के साथ मिलकर त्योहार मनाया.
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि होली महोत्सव के माध्यम से लोगों के बीच उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने काशीपुर नगर निगम की पूरी टीम को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी और उपस्थित सभी लोगों को होली की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है.
मुख्यमंत्री ने सभी आयु वर्ग के लोगों को उत्साह और एकता के साथ त्योहार मनाते देखकर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा, “होली केवल रंग लगाने और उत्साह से मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का पर्व है. रंगों का यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन की सच्ची खुशी आपसी संबंधों को मजबूत करने में है.”
होली, जिसे वसंतोत्सव भी कहा जाता है, वसंत ऋतु के आगमन और फसल कटाई के मौसम का प्रतीक है. यह पर्व हिंदू पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है.
होली का आरंभ होलिका दहन से होता है, जिसमें होलिका के दहन के प्रतीक स्वरूप अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है और बुराई के नाश के लिए विशेष पूजा की जाती है. पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति भक्ति से क्रोधित थे. उन्होंने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को मारने का आदेश दिया, लेकिन अंततः बुराई का नाश हुआ और भक्ति की विजय हुई.
