गुरदासपुर, एक मार्च (भाषा) पंजाब के गुरदासपुर में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपियों में से एक रणजीत सिंह के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसके परिवार ने रविवार को उसकी मौत की सीबीआई जांच की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
परिवार ने चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम कराने की भी मांग की।
गुरदासपुर के बाबरी बाईपास पर हुए विरोध प्रदर्शन में स्थानीय लोग और सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
पंजाब पुलिस के एएसआई गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार 22 फरवरी को गुरदासपुर जिले के अधियान गांव में एक जांच चौकी के भीतर मृत पाए गए थे। यह गांव पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग दो किलोमीटर दूर है।
पुलिस ने बाद में रणजीत सिंह (19), इंद्रजीत सिंह (21) और दिलावर सिंह (19) की पहचान हत्या में उनकी कथित संलिप्तता के लिए की।
माना जाता है कि ये हत्याएं जासूसी एजेंसी ‘इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस’ (आईएसआई) द्वारा समर्थित उनके पाकिस्तान स्थित आकाओं के इशारे पर की गई थीं।
रणजीत बुधवार को पुलिस हिरासत से भागने के बाद पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।
रणजीत के परिवार ने मुठभेड़ पर सवाल उठाए हैं, जिसके चलते कई राजनीतिक नेताओं ने इसकी आलोचना की और मामले की न्यायिक जांच की मांग की।
रणजीत के परिवार ने भी ‘‘न्याय’’ मिलने तक उसके शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
रविवार के प्रदर्शन में शामिल होने वाले कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने मुठभेड़ को फर्जी बताया।
खैरा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यदि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार इस तरह पुलिस को लोगों को मारने की अनुमति दे सकती है, तो अरविंद केजरीवाल को बी.आर. आंबेडकर की तस्वीरें हटाकर पंजाब में आपराधिक न्याय प्रणाली को बंद कर देना चाहिए, अभियोजन तंत्र को भंग कर देना चाहिए और यह घोषणा कर देनी चाहिए कि अब केवल पुलिस ही तय करेगी कि कौन जिएगा और कौन मरेगा।’’
भाषा
देवेंद्र सुरेश
सुरेश
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