रांची, एक मार्च (भाषा) झारखंड के धनबाद नगर निगम (डीएमसी) में भाजपा के ‘बागी’ संजीव सिंह ने महापौर पद के लिए हुए चुनाव में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे। रविवार को एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह शुरू हुई राज्य के सभी 48 शहरी स्थानीय निकायों के लिए मतों की गिनती शनिवार रात धनबाद नगर निगम (डीएमसी) के परिणामों की घोषणा के बाद संपन्न हो गई।
नगर निकाय चुनाव राजनीतिक दलों के चिह्नों पर नहीं लड़े गए, लेकिन उम्मीदवारों को इनका का समर्थन प्राप्त था।
राज्य चुनाव आयोग के सचिव राधे श्याम प्रसाद ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘नगर निकायों के निर्वाचित सदस्य अब 10 से 20 मार्च के बीच अपने-अपने स्थानीय निकायों के उप महापौर या उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे। वे इस अवधि के दौरान शपथ भी लेंगे।’’
उन्होंने बताया कि रांची नगर निगम में शपथग्रहण समारोह और उपमहापौर का चुनाव 19 मार्च को होगा, जबकि डीएमसी के लिए यही समारोह 18 मार्च को निर्धारित है।
भाजपा के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने पार्टी के समर्थन के बिना चुनाव लड़ा था। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी झामुमो समर्थित चंद्रशेखर अग्रवाल को 31,902 मतों से हराया।
सिंह को कुल 1,14,362 वोट मिले, जबकि अग्रवाल को 83,460 वोट प्राप्त हुए। भाजपा समर्थित संजीव कुमार को मात्र 57,895 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे। पूर्व विधायक ने कहा कि वे धनबाद के विकास के लिए काम करेंगे।
धनबाद के विधायक राज सिन्हा ने कहा कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार चुनाव में नए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मतदाताओं में भ्रम की स्थिति थी क्योंकि सिंह भाजपा में रह चुके हैं और उनकी पत्नी (रागिनी सिंह) झरिया से पार्टी की विधायक हैं।’’
बोकारो जिले के चास नगर निगम में, निर्दलीय उम्मीदवार भोलू पासवान ने 17,796 वोट हासिल करके महापौर पद जीत लिया। उन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार अविनाश कुमार को 3,196 मतों से हराया।
निर्दलीय उम्मीदवारों ने 48 शहरी स्थानीय निकायों में महापौर या अध्यक्ष के 20 पदों पर जीत हासिल करके अपनी पहचान बनाई।
भाजपा समर्थित 13 उम्मीदवारों ने महापौर या अध्यक्ष के पद जीते, जबकि झामुमो समर्थित 11 उम्मीदवारों और कांग्रेस समर्थित तीन उम्मीदवारों ने नौ नगर निगमों, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में शीर्ष पदों पर कब्जा जमाया।
नगर निकाय चुनाव 23 फरवरी को हुए थे, जिनमें कुल 43 लाख मतदाताओं में से 63 प्रतिशत से अधिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
भाषा तान्या नेत्रपाल
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