मुंबई, 28 फरवरी (भाषा) शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) ने आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल को बरी किए जाने को शनिवार को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई पर एक करारा ‘तमाचा’ करार दिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मामले ‘‘गढ़ने’’ वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विपक्षी दल ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक तीखे संपादकीय में आरोप लगाया कि आबकारी नीति मामले में लगाए गए आरोप ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित’’ थे और दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं, दिल्ली के उपराज्यपाल तथा ईडी एवं सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने राष्ट्रीय राजधानी में आप सरकार को हटाने के लिए मिलीभगत की थी।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया। आबकारी नीति मामले से आप सरकार की छवि धूमिल हुई थी।
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाते हुए कहा कि उसे नीति में कोई व्यापक षड्यंत्र या आपराधिक मंशा’’ नहीं मिली।
केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आबकारी नीति मामले में और बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, लेकिन 155 दिन जेल में बिताने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।
संपादकीय में अदालत के फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई पर ‘‘तमाचा’’ करार दिया गया और दावा किया गया कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में विफल रहा है।
पार्टी ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोप निराधार थे और कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं हुई, साथ ही अदालत ने मामले को ‘‘खोखला’’ बताया।
संपादकीय में दावा किया गया कि केजरीवाल के आवास पर छापे मारे गए और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लंबे समय तक जेल में रखा गया जिसका मकसद दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले उनकी सरकार को भ्रष्ट सरकार के रूप में चित्रित करना था।
भाषा सुरभि संतोष
संतोष
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