श्योपुर, 27 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दुर्लभ और लुप्तप्राय ‘फॉरेस्ट आउलेट’ (वन उल्लू) देखे जाने से वन अधिकारियों में उत्साह है। यह घटनाक्रम अफ्रीका से चीतों के तीसरे समूह को लाये जाने से ठीक पहले सामने आया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे ‘‘पक्षी-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटना’’ बताया।
आठ चीते शनिवार को दक्षिणी अफ्रीका के बोत्सवाना से कुनो लाये जाएंगे। इन चीतों को उस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लाया जा रहा है जिसके तहत चीतों को भारत में फिर से बसाया जा रहा है। चीते लगभग सात दशक पहले देश से विलुप्त हो गए थे।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभरंजन सेन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ‘फॉरेस्ट आउलेट’ विश्व के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में गिना जाता है और इसका कुनो में देखा जाना पारिस्थितिकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह पक्षी-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। संकटग्रस्त ‘फॉरेस्ट आउलेट’ पहली बार कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दर्ज किया गया है।’’
सेन ने कहा कि ‘फॉरेस्ट आउलेट’ देखे जाने से यह संकेत मिलता है कि चीता संरक्षण कार्यक्रम शुरू होने के बाद उद्यान संकटग्रस्त शिकारी पक्षियों के लिए भी अनुकूल आवास बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह दर्शाता है कि चीतों के लिए किए जा रहे संरक्षण प्रयास व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के पुनरुद्धार में भी योगदान दे रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि यह दुर्लभ पक्षी स्थानीय पर्यटन संचालक लाभ यादव ने कुनो के परोंद बीट में नियमित भ्रमण के दौरान देखा। उन्होंने कहा कि इसे देखे जाने को वनकर्मियों ने गंभीरता से लिया।
सेन ने बताया कि पुणे स्थित ‘वाइल्डलाइफ रिसर्च एंड कंजरवेशन सोसाइटी’ के विवेक पटेल ने पहचान के प्रमुख लक्षणों के आधार पर मौके पर ही इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यह कुनो में ‘फॉरेस्ट आउलेट’ का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड बन गया।
अधिकारी के अनुसार, अधिकांश उल्लुओं के विपरीत ‘फॉरेस्ट आउलेट’ मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहता है और सुबह छह से दस बजे के बीच अधिक देखा जाता है। उन्होंने कहा कि यह तेज धूप में भी ऊंचे पेड़ों की डालियों पर बैठा दिखाई देता है।
‘फॉरेस्ट आउलेट’ मध्य भारत का स्थानिक पक्षी है। इसका पहला वर्णन 1872 में किया गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया। वर्ष 1997 में महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में इसके पुनः देखे जाने से विश्व भर के पक्षी-विज्ञानियों का ध्यान आकर्षित हुआ था।
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में यह प्रजाति मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ विखंडित वन क्षेत्रों में पाई जाती है। मध्यप्रदेश में इससे पहले इसका रिकॉर्ड केवल खंडवा (पूर्वी भाग), बुरहानपुर और बैतूल जिलों में था।
अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने ‘फॉरेस्ट आउलेट’ को ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी में रखा है। अधिकारियों के अनुसार, इसकी वैश्विक वयस्क आबादी 250 से 999 के बीच आंकी गई है और राज्य में इसकी मौजूदगी को समझने के लिए और सर्वेक्षण की आवश्यकता है।
भाषा सं दिमो संतोष अमित
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