scorecardresearch
Friday, 27 February, 2026
होमदेशगलत व्याख्या के डर से भाषणों में हास्य का प्रयोग कम हो रहा: फडणवीस

गलत व्याख्या के डर से भाषणों में हास्य का प्रयोग कम हो रहा: फडणवीस

Text Size:

मुंबई, 27 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषणों में हास्य का इस्तेमाल कम होने पर अफसोस व्यक्त करते हुए शुक्रवार को कहा कि हास-परिहास से भरपूर भाषण से मिलने वाला आनंद अब काफी कम हो गया है, क्योंकि लोग अब गलत व्याख्या से बचने के लिए ‘‘अत्यधिक सावधानी’’ बरतते हैं।

फडणवीस ने यहां विधान भवन में मराठी भाषा गौरव दिवस समारोह में कहा कि जब हास्य को कभी-कभी (अनावश्यक रूप से) किसी की पहचान से जोड़ा जाता है और संदर्भ से बाहर ले जाया जाता है, तो यह अपनी चमक खो देता है।

राज्य सरकार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि वी.वी. शिरवाडकर की जयंती के उपलक्ष्य में मराठी भाषा गौरव दिवस मनाती है, जो ‘कुसुमाग्रज’ उपनाम से लिखते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘जब हास्य को कभी-कभी (अनावश्यक रूप से) किसी की पहचान से जोड़ दिया जाता है और संदर्भ से अलग कर दिया जाता है, तो उसकी चमक फीकी पड़ जाती है। लोग अब हास्य का प्रयोग अत्यंत सावधानी से करने लगे हैं। हास्य से भरपूर भाषण से मिलने वाला आनंद अब काफी कम हो गया है।’’

मराठी की विरासत पर प्रकाश डालते हुए, फडणवीस ने कहा कि इस भाषा ने समाज और शासन में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मराठी भाषा ने हमें बहुत कुछ दिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने राज्य की आधिकारिक भाषा के लिए एक शब्दकोश बनवाया था। उन्होंने अन्य भाषाओं के शब्दों को हटाकर उनकी जगह स्थानीय शब्दों को शामिल किया था।’’

केंद्र सरकार द्वारा मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने इस मान्यता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया।

भाषा में विविधता को रेखांकित करते हुए फडणवीस ने कहा, ‘‘हमारी भाषा समृद्ध है, और साथ ही इसमें विविधताएँ भी हैं। चूंकि मैं विदर्भ क्षेत्र से आता हूँ, इसलिए मेरी उच्चारण शैली यहाँ स्वीकार्य नहीं थी। मैंने बाद में इसे बदल दिया।’’

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने दुनिया पर राज किया, और इसलिए, अंग्रेजी भाषा वैश्विक हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों ने इसे सीखा, और कुछ ने इसलिए सीखा क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था।

फडणवीस ने कहा, ‘‘जब हम लोगों में यह भावना पैदा कर देंगे कि मराठी सीखने से लोग प्रगति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं, तो भाषा का भविष्य बेहतर होगा।’’

भाषा

नेत्रपाल माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments