नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई की उपाध्यक्ष खुशबू सुंदर का कहना है कि तमिलनाडु में मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के बीच है—अभिनेता विजय के दावे के विपरीत.
उनकी यह टिप्पणी कुछ दिनों बाद आई, जब तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक और अभिनेता विजय ने 23 फरवरी को वेल्लोर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “मुकाबला विजय और स्टालिन सर के बीच है. तमिलनाडु विजय है, विजय तमिलनाडु है. जंग टीवीके और डीएमके के बीच है.”
एक इंटरव्यू में सुंदर ने दिप्रिंट से कहा, “जब असली राजनीतिक मैदान की बात आती है, तो हर कोई जानता है कि मुकाबला मुख्य रूप से डीएमके और एनडीए के बीच है. विजय बीच में कहीं हैं. हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि वह किसी भी पक्ष पर कितना असर या नुकसान पहुंचाते हैं.”
आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके के असर को समझाते हुए बीजेपी नेता ने माना कि “युवा पीढ़ी उत्साहित है क्योंकि विजय आज तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय अभिनेता हैं”, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि “राजनीति बिल्कुल अलग खेल है.”
उन्होंने कहा, “तो हां, लोग उत्साहित हैं कि उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया है.”
एआईएडीएमके और बीजेपी आगामी राज्य चुनाव साथ मिलकर लड़ रहे हैं. उनका गठबंधन पिछले साल चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर से शुरू हुआ था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) मौजूद थे.
दक्षिणी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की उम्मीद में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को चुनाव प्रभारी भी नियुक्त किया है.
टीवीके पर टिप्पणी करते हुए सुंदर ने कहा कि विजय की लोकप्रियता उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी की गारंटी नहीं देती.
उन्होंने कहा, “अगर विजय सोचते हैं कि इसी चुनाव में वह मुख्यमंत्री बन जाएंगे और अगर कोई उन्हें इस दिशा में सलाह दे रहा है, तो मैं कहूंगी कि यह बिल्कुल गलत है. मैं कहूंगी, ‘भाई, आप राजनीति में बहुत नए हैं और भोले बन रहे हैं’.”
उन्होंने आगे कहा, “वो दिन चले गए जब पुरच्ची थलैवर एमजीआर अमेरिका के अस्पताल में भर्ती थे, बोल नहीं पा रहे थे, आवाज़ चली गई थी और सिर्फ अस्पताल के बिस्तर से इशारा करने पर भी AIADMK को बड़ी जीत मिल जाती थी. अब वो दिन नहीं रहे. अब ऐसा नहीं हो सकता.”
सुंदर ने कहा, “समय बदल गया है. जो लोग आपको देखने आते हैं, ज़रूरी नहीं कि वही लोग आपको वोट भी दें. हां, आपको अच्छा-खासा जनसमर्थन मिलेगा और मैं इससे सहमत हूं, लेकिन वह समर्थन कितने समय तक टिकेगा, यह बड़ा सवाल है.”
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि 2026 के राज्य चुनाव में यह भी अहम होगा कि विजय अपनी रफ्तार और समर्थन को कितने समय तक बनाए रख पाते हैं.
विजय के इस बयान पर कि असली लड़ाई डीएमके और उनकी नई पार्टी के बीच है, सुंदर ने कहा, “डीएमके के खिलाफ उनका मजबूत विरोध साफ है, इसलिए शायद वह ऐसा महसूस करते हैं, लेकिन जब असली राजनीतिक मैदान की बात आती है, तो हर कोई जानता है कि मुकाबला मुख्य रूप से डीएमके और एनडीए के बीच है. विजय बीच में हैं.”
पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK नेता जयललिता का ज़िक्र करते हुए सुंदर ने कहा कि एक समय था जब लोग कहते थे कि वह कभी सत्ता में वापस नहीं आएंगी, क्योंकि तमिलनाडु के इतिहास में कोई भी सरकार लगातार दो बार सत्ता में नहीं लौटी थी.
“लेकिन उन्होंने यह धारणा बदल दी—वह जीतीं और लगातार दो बार सत्ता में लौटीं. लोग यह भी कहते थे कि बीजेपी को दक्षिण में कभी जगह नहीं मिलेगी. फिर भी केरल में हमने सीटें जीतीं और तिरुवनंतपुरम में हमारा पहला मेयर है. लोग कहते थे कि तमिलनाडु में कमल कभी नहीं खिलेगा, लेकिन आज राज्य में चार मौजूदा विधायक हैं. तो वक्त बदल रहा है.”
उन्होंने जोड़ा, “हमें पूरी उम्मीद है और हम बहुत सकारात्मक हैं कि इस चुनाव में भारत एक बहुत बड़ी जीत देखेगा.”
2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और चार सीटें जीतीं. उसे पूरे राज्य में 2.62 प्रतिशत वोट शेयर मिला. AIADMK ने 179 सीटों पर चुनाव लड़ा और 33.29 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 66 सीटें जीतीं.
राज्य में बीजेपी की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए सुंदर ने कहा कि बीजेपी “बहुत मजबूत स्थिति” में है.
सुंदर ने जोर देकर कहा, “लोगों ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर जो भरोसा दिखाया है और पिछले 12 साल में बीजेपी सरकार ने जो अच्छा काम किया है, उसे देखते हुए हम बहुत मजबूत स्थिति में हैं.”
“वो वक्त चला गया जब लोग कहते थे कि बीजेपी तमिलनाडु के लोगों के दिल में जगह नहीं बना सकती. हमारे चार मौजूदा विधायक हैं…मुझे पूरा विश्वास है कि यह संख्या बढ़ेगी.”
भाषा के मुद्दे और डीएमके के इस आरोप पर कि बीजेपी हिंदी थोप रही है, सुंदर ने दावा किया, “हर स्कूल, हर शैक्षणिक संस्थान—जो डीएमके चलाती है—हिंदी को दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाता है…वे सभी CBSE फार्मूला अपनाते हैं.”
सुंदर ने सवाल उठाया कि अगर डीएमके तमिल, तमिल संस्कृति और तमिल भाषा को लेकर इतनी गंभीर है, तो “उन्होंने राज्य बोर्ड के स्कूल क्यों नहीं चलाए?”
उन्होंने कहा, “हिंदी भाषा को अपनाने वाले सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु से हैं. इसलिए आप चाहे जितना गलत प्रचार करें, फिर भी लोग हिंदी को दूसरी भाषा के रूप में चुन रहे हैं.”
बीजेपी को अल्पसंख्यक-विरोधी पार्टी मानने की धारणा पर पूछे गए सवाल पर सुंदर ने कहा कि मोदी सरकार की हर योजना हर नागरिक के लिए है और इसमें कोई भेदभाव नहीं है.
राजस्थान के टोंक जिले में एक हालिया विवाद पर टिप्पणी करते हुए—जहां पूर्व बीजेपी सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने कंबल वितरण कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं को यह कहकर लौटा दिया कि “वे पीएम मोदी को गालियां देती हैं”—सुंदर ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया. उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि मोदी जी भी इसे स्वीकार नहीं करेंगे.”
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