पटना, 26 फरवरी (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बृहस्पतिवार को विधानसभा को बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आधिकारिक अभिलेखों से कम से कम पांच प्रतिशत महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज हटा दिए गए हैं, जिसके बाद अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।
सिन्हा ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में भूखंडों के मूल मालिकों के नाम “जानबूझकर बदले” गए।
उन्होंने कहा, “यह गंभीर चिंता का विषय है। निहित स्वार्थ वाले व्यक्तियों द्वारा दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से इन दस्तावेजों को अभिलेखों से हटाया गया या चोरी किया गया है। उपलब्ध सूचनाओं से भूमि माफिया और अधिकारियों की संलिप्तता का संकेत मिलता है। कम से कम पांच प्रतिशत महत्वपूर्ण दस्तावेज अभिलेखों से गायब हैं।”
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का प्रभार भी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों, जिनमें सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं, का पता लगाने के लिए विभाग ने अभियान शुरू किया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, “कुछ क्षेत्रों में निहित स्वार्थ वाले लोगों द्वारा जमीन के मूल मालिकों के नाम जानबूझकर बदल दिए गए। राज्य सरकार लापता दस्तावेजों को निश्चित रूप से बरामद करेगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जाएगा।”
प्रश्नकाल के दौरान जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक राहुल कुमार सिंह ने यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके डुमरांव निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 60 प्रतिशत भूमि के मूल मालिकों के नाम वर्ष 1989 में विभागीय अधिकारियों द्वारा जानबूझकर बदल दिए गए थे।
सिंह ने कहा, “ऐसी जमीन के मूल मालिकों को दस्तावेजों में सुधार कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह कैसे हुआ? मामले की जांच होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।”
सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों ने भी सिंह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में भी लोग इसी प्रकार की समस्या का सामना कर रहे हैं।
इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा, “अधिकारियों को पहले ही निर्देश दिया जा चुका है कि सरकारी जमीन समेत किसी भी भूमि पर माफिया या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण नहीं होने दिया जाए।”
सिन्हा ने कहा कि विभाग राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के उन अधिकारियों की पहचान करेगा जो भूमि माफिया के साथ मिलीभगत में शामिल हैं।
भाषा कैलाश मनीषा
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