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Thursday, 26 February, 2026
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यूक्रेन वॉर के 4 साल: भारत के साथ संबंधों में ‘ठहराव’ पर राजदूत ने कहा— ‘कीव की कोशिशें एकतरफा रहीं’

दिप्रिंट के साथ इंटरव्यू में, भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने शांति के रास्ते पर चर्चा की, और भारत के साथ मानवीय सहायता और मिलिट्री-टेक सहयोग पर ज़ोर दिया.

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नई दिल्ली: भारत में यूक्रेन के राजदूत ऑलेक्ज़ेंडर पोलिशचुक ने मंगलवार को दिप्रिंट को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने की यूक्रेन की कोशिशें अब तक “एकतरफा” रही हैं और नई दिल्ली की तरफ से बहुत “सकारात्मक” जवाब नहीं मिला है.

रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ पूरी सैन्य कार्रवाई शुरू किए चार साल पूरे होने पर अपने लिखित संदेश में पोलिशचुक ने कहा कि अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कीव यात्रा “ऐतिहासिक” थी. इस यात्रा ने संस्कृति और तकनीकी सैन्य सहयोग जैसे क्षेत्रों में गहरी साझेदारी की नींव रखी थी, जिस पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ सहमति बनी थी. हालांकि, दोनों नेताओं के बीच जिन कई संस्थागत तंत्रों पर सहमति बनी थी, वे अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं.

मोदी और जेलेंस्की की कीव यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान पर राजदूत ने कहा, “मेरे लिए, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो पेशेवर तौर पर रणनीतिक और संचालन योजना से जुड़ा है, यह दस्तावेज राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के मार्गदर्शक निर्देशों की तरह है. इसलिए, नेताओं के द्विपक्षीय समझौतों को लागू करने के लिए यूक्रेन ने इस रणनीतिक लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से हासिल करने के लिए एक उपयुक्त रोडमैप तैयार किया.”

उन्होंने कहा, “इसका मसौदा अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी गहरी करने के लिए बनी कार्य समूहों की चर्चाओं के नतीजों के आधार पर तैयार किया गया था. इन समूहों की बैठकें पिछले कुछ वर्षों में होती रही थीं.”

उन्होंने आगे कहा, “दुर्भाग्य से, जैसा कि आपने सही कहा, उसके बाद एक ठहराव का दौर आ गया. रिश्तों में गति बनाए रखने के लिए यूक्रेन की कोशिशें ज्यादातर एकतरफा रहीं और हमारे भारतीय साझेदारों की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली.”

24 फरवरी 2022 को मॉस्को ने यूक्रेन के क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया था, खासकर पूर्वी हिस्से के पांच प्रांतों पर, जिन्हें सामूहिक रूप से डोनबास क्षेत्र कहा जाता है. यह युद्ध चार साल से जारी है. यूक्रेन अब भी उन बड़े इलाकों पर नियंत्रण बनाए हुए है, जिन पर रूस दावा करता है.

पिछले कुछ महीनों में कीव पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि अमेरिका का समर्थन कमजोर पड़ा है और यूरोपीय संघ के भीतर भी सही समय पर पर्याप्त फंड सुनिश्चित करने में मुश्किलें आई हैं. पिछले साल के अंत से यूरोपीय संघ द्वारा घोषित 90 अरब यूरो का पैकेज हंगरी के विरोध के कारण अटका हुआ है. हंगरी रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंध बनाए रखना चाहता है.

भारत ने लगातार कहा है कि चार साल से चल रहे इस युद्ध का समाधान केवल “संवाद और कूटनीति” से ही संभव है. साथ ही भारत ने रूस के साथ अपने मजबूत आर्थिक रिश्ते भी बनाए रखे हैं, खासकर रूसी कच्चे तेल के आयात के जरिए. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद, जो रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए, इन आयातों में हाल के महीनों में कमी देखी गई है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर 2025 में वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक के लिए भारत आए थे. जहां भारत-रूस के द्विपक्षीय तंत्र हर साल चलते रहे हैं, वहीं नई दिल्ली और कीव 2024 के अंत में यूक्रेन-भारत अंतर-सरकारी आयोग की सातवीं बैठक नहीं कर पाए.

पोलिशचुक ने कहा कि ‘सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम’ 2024-2028 के तहत 2025 की चौथी तिमाही में भारत में आयोजित होने वाला यूक्रेनी सांस्कृतिक महोत्सव भी नहीं हो पाया.

राजदूत ने कहा, “यह आंशिक रूप से इसलिए हुआ क्योंकि जब राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा पर थे, उसी समय यूक्रेनी कलाकारों को भारत आने के लिए वीजा नहीं मिला.”

उन्होंने यह भी जोड़ा, “मैं साजिश सिद्धांतों की तरफ झुकाव नहीं रखता और न ही भारतीय पक्ष की हर कार्रवाई या निष्क्रियता के पीछे मॉस्को का हाथ देखता हूं. नेताओं की राजनीतिक इच्छा को लागू करने में जो ठहराव आया है, उसके कारण सामान्य भी हो सकते हैं.”

एक और क्षेत्र जहां भारतीय पक्ष की ओर से स्पष्टता नहीं है, वह है सैन्य-तकनीकी सहयोग. जहाजों के इंजन के अलावा, पिछले चार वर्षों में यूक्रेन ने जरूरत के चलते एक बड़ा रक्षा उद्योग तंत्र विकसित किया है. साथ ही मानव रहित हवाई वाहन और मानव रहित पानी के भीतर चलने वाले वाहनों जैसी तकनीकों का नया और अभिनव इस्तेमाल किया है. रिपोर्टों के अनुसार कीव के पास हर साल लगभग 60 लाख मानव रहित वाहन बनाने की क्षमता है.

पोलिशचुक ने कहा, “हमारे पास भारत के साथ संयुक्त द्विपक्षीय रक्षा सहयोग परियोजनाएं लागू करने की पर्याप्त क्षमता है. हम इन मुद्दों पर भारतीय-यूक्रेनी सैन्य-तकनीकी सहयोग संयुक्त कार्य समूह के ढांचे में चर्चा के लिए तैयार हैं. बेशक, जब उसकी बैठक की तारीख तय हो जाए, जैसा कि अगस्त 2024 के संयुक्त भारत-यूक्रेन बयान में तय किया गया है.”

राजदूत ने एक सावधानी भी जोड़ी, “बेशक, यह तभी संभव है जब दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के बाद भारतीय पक्ष की सैन्य-तकनीकी सहयोग में प्राथमिकताएं नहीं बदली हों.”

भारत-यूक्रेन व्यापार

पिछले चार साल में रूस के साथ भारत का आर्थिक जुड़ाव बढ़कर दोतरफा वस्तु व्यापार में 60 अरब डॉलर से ज्यादा का हो गया. वहीं नई दिल्ली और कीव के बीच व्यापार में कमी आई. इसकी एक वजह यह भी थी कि युद्ध के शुरुआती महीनों में समुद्री रास्ते बंद हो गए थे.

पोलिशचुक ने कहा, “रूस के पूर्ण हमले से पहले यूक्रेन और भारत के बीच व्यापार का स्तर 3.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. पिछले दो वर्षों में हमने व्यापार की मात्रा में धीरे-धीरे सुधार देखा है. 2025 के अंत तक द्विपक्षीय व्यापार 2.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया.”

उन्होंने कहा, “15 मई 2024 को हुई व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्य समूह की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आगे के आपसी लाभ वाले आर्थिक सहयोग के लिए व्यावहारिक क्षेत्रों की पहचान की. अब अगला कदम अंतर-सरकारी आयोग यानी आईजीसी का है, जिसे कार्य समूह के प्रस्तावों को अंतर-सरकारी स्तर पर मंजूरी देनी है और उन्हें लागू करने के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’ देना है.”

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच यूक्रेन को भारत का कुल निर्यात लगभग 141 मिलियन डॉलर रहा, जबकि कीव से भारत का आयात लगभग 549 मिलियन डॉलर का था.

पोलिशचुक ने कहा कि एक और क्षेत्र जहां भारत ज्यादा भूमिका निभा सकता है, वह है मानवीय सहायता.

उन्होंने कहा कि चीन, जिसने लंबे समय से मॉस्को की युद्ध मशीन को समर्थन दिया है, 2022 से अब तक कीव को लगभग 13 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता दे चुका है. दिसंबर 2025 में ही यूक्रेन को 600 से ज्यादा डीजल जनरेटर भेजे गए, जब रूस बार-बार देश की ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा था.

यूक्रेनी राजदूत ने कहा, “आज भारत आर्थिक विकास के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है और निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. इसे देखते हुए और भारत की मानवीय परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, भारत यूक्रेन को और अधिक मानवीय सहायता दे सकता है. इसके लिए उसके पास सभी जरूरी सामग्री और तकनीकी क्षमता मौजूद है. जरूरत सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति की है.”

शांति का रास्ता

चार साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के खत्म होने का सवाल अभी भी बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने पिछले एक साल में कीव पर दबाव डाला है कि वह मॉस्को के साथ युद्धविराम की शर्तें स्वीकार करे, जिनमें क्षेत्र की अदला-बदली भी शामिल है.

2025 के अंत में अमेरिका द्वारा साझा की गई 28 बिंदुओं की एक मसौदा शांति योजना में रूस की कई “अधिकतम” मांगों का समर्थन दिखाई दिया. इनमें डोनेट्स्क प्रांत के भीतर एक असैन्य क्षेत्र बनाने की मांग भी शामिल थी, जबकि कीव अब भी उस पूरे प्रांत के लगभग एक चौथाई हिस्से पर नियंत्रण रखता है.

पोलिशचुक ने कहा, “मैं जोर देकर कहना चाहता हूं कि यूक्रेन एक संप्रभु, स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, सामाजिक और, मैं विशेष रूप से कहूंगा, कानून के शासन वाला राज्य है. यह मूल सिद्धांत यूक्रेन के संविधान के अनुच्छेद 1 में दर्ज है. हमारे संविधान का अनुच्छेद 2 कहता है कि मौजूदा सीमाओं के भीतर यूक्रेन का क्षेत्र अखंड और अविभाज्य है. यूक्रेन के क्षेत्र में किसी भी बदलाव का फैसला केवल पूरे यूक्रेन में जनमत संग्रह के जरिए ही किया जा सकता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 73 में लिखा है.”

उन्होंने कहा, “इसी कारण क्षेत्रीय अखंडता का मुद्दा रूस के साथ सौदेबाजी या दबाव का विषय नहीं हो सकता. अब तक चल रही बातचीत का एकमात्र सकारात्मक नतीजा युद्ध बंदियों की अदला-बदली और रिहाई रहा है. बाकी सभी मामलों में रूस बातचीत को अल्टीमेटम के तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और ऐसी शर्तें रख रहा है जो पहले से ही युद्धविराम के लिए अस्वीकार्य हैं.”

राजदूत ने कहा कि मॉस्को के पास कीव के क्षेत्र पर अपने बार-बार किए जा रहे दावों के लिए “कोई आधार” नहीं है, खासकर तब जब इसकी भारी सैन्य कीमत चुकानी पड़ रही है और हर दिन लगभग 1,000 सैनिकों की मौत हो रही है.

उन्होंने कहा, “यूक्रेन के राष्ट्रपति कई बार कह चुके हैं कि अगर क्रेमलिन की ओर से राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो तुरंत युद्धविराम लागू किया जा सकता है. अभी तक हमें ऐसी कोई इच्छा नहीं दिखती. पुतिन इस युद्ध को खत्म नहीं करना चाहते और यूक्रेन के नागरिक और महत्वपूर्ण ढांचे पर हमले के आपराधिक आदेश देते रहे हैं, जिससे निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं.”

ट्रंप ने 2024 में वादा किया था कि वह व्हाइट हाउस में सत्ता संभालने के 24 घंटे के भीतर इस युद्ध को खत्म कर देंगे. लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल का एक साल बीतने के बाद भी युद्ध जारी है और कुछ मोर्चों पर इसकी तीव्रता और बढ़ गई है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जुलाई 2024 में कहा था कि भारत का “प्रयास” है कि कीव और मॉस्को बातचीत की मेज पर आएं. हालांकि इसके बाद एक साल में मोदी और जेलेंस्की के बीच फोन पर बातचीत हुई, लेकिन आमने-सामने मुलाकात नहीं हो पाई. पिछले जून में कनाडा में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात तय थी, लेकिन उसे टालना पड़ा.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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