गुरुग्राम: हरियाणा सरकार के बैंक खातों से जुड़े कथित 578 करोड़ रुपये के घोटाले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अब यह भी सामने आया है कि वित्त विभाग ने पिछले साल जुलाई में ही गड़बड़ियों को पकड़ लिया था.
हरियाणा के पुलिस डायरेक्टर जनरल (विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो) अर्शिंदर सिंह चावला ने बुधवार को बताया कि इस मामले में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें संदिग्ध मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के साथ अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति शामिल हैं.
डीजीपी ने यह नहीं बताया कि आरोपियों में कोई बैंक कर्मचारी शामिल है या नहीं.
धोखाधड़ी के आरोप इस हफ्ते सामने आए, जब आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने शेयर बाजार को बताया कि चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में कुछ अनधिकृत लेनदेन पाए गए हैं. बैंक ने माना कि उसके कुछ कर्मचारी बाहरी लोगों के साथ मिलकर इन लेनदेन में शामिल हो सकते हैं. बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और एक बाहरी एजेंसी से ऑडिट कराने का आदेश दिया है.
दिप्रिंट को पता चला कि 7 जुलाई 2025 को वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और राज्य की निगमों, बोर्डों और स्वायत्त संस्थाओं के सीईओ को एक पत्र लिखा था, जिसमें गड़बड़ियों की बात कही गई थी.
इस पत्र की कॉपी दिप्रिंट ने देखी है. इसमें बैंक खातों के संचालन और फिक्स्ड डिपॉजिट के प्रबंधन से जुड़े दिशा-निर्देशों का लगातार पालन न होने की बात कही गई थी.
पत्र में तीन तरह की गड़बड़ियों का खास जिक्र किया गया था. पहला, नजदीकी शाखा के नियमों का पालन किए बिना खाते खोलना. दूसरा, निजी पसंद के आधार पर बैंकों का चयन करना. तीसरा, फिक्स्ड डिपॉजिट संभालने में पक्षपात के संकेत.
पत्र में पंचकूला के दफ्तरों का भी खास जिक्र था, जहां ज्यादातर विभागों के मुख्यालय हैं. कहा गया कि वहां से चंडीगढ़ में बिना वैध कारण और तय निर्देशों के खिलाफ जाकर बैंक खाते खोले गए.
हर विभाग से कहा गया था कि वह 15 दिनों के अंदर सभी खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट का आंतरिक ऑडिट करे और 30 जुलाई 2025 तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करे.
पत्र में चेतावनी दी गई थी कि नियमों का पालन न करने पर जवाबदेही तय की जाएगी. हालांकि यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि वे ऑडिट हुए या नहीं और अनुपालन रिपोर्ट जमा हुई या नहीं.
दिप्रिंट ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव से संपर्क किया है. जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.
मुख्य सवाल
जांच अधिकारी अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब सभी सरकारी विभागों का मुख्यालय पंचकूला में है तो उन्होंने नियमों के खिलाफ जाकर चंडीगढ़ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखाओं में खाते क्यों खोले, जबकि नियम के मुताबिक खाते नजदीकी शाखा में खोले जाने चाहिए.
एसीबी के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि इसका जवाब उन निजी ऑपरेटरों के नेटवर्क में हो सकता है, जिन्होंने कुछ आईएएस अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंध बनाए और खास चंडीगढ़ शाखाओं में खाते खुलवाए.
जांच अधिकारियों ने कहा कि इन खातों से पैसा कथित तौर पर शेयर बाजार और अन्य निवेश के साधनों में लगाया गया और इन निजी ऑपरेटरों ने पैसों की पूरी कड़ी संभाली.
एफआईआर में क्या कहा गया
23 फरवरी को पंचकूला के सेक्टर 17 थाने में दर्ज एफआईआर में मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 के तहत हरियाणा सरकार के दो खातों में कथित जालसाजी और नियमों के उल्लंघन का जिक्र है. ये खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में खोले गए थे.
एफआईआर में उस अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर का जिक्र है, जिसने पहले ही अपना कार्यभार छोड़ दिया था. ऐसे चेक का भी जिक्र है, जिनमें अंकों और शब्दों में लिखी रकम मेल नहीं खाती थी. साथ ही लेनदेन की सूचना एक ऐसे मोबाइल नंबर पर भेजी गई, जो एक सरकारी अधीक्षक के नाम पर दर्ज था.
एफआईआर इंस्पेक्टर अमित कुमार ने दर्ज कराई, जो राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो में तैनात हैं. जांच डीएसपी शुकर पाल को सौंपी गई है.
सीएम बोले पैसा वापस आए
बुधवार को अखबारों में प्रकाशित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को लिखे अपने पत्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि जांच जारी है और वह हरियाणा सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है. बैंक ने कहा कि उसने राज्य सरकार को मूल रकम और ब्याज की 100 प्रतिशत राशि वापस कर दी है.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि लेनदेन के 24 घंटे के अंदर ही बैंकों ने 556 करोड़ रुपये की मूल राशि और 22 करोड़ रुपये ब्याज, कुल 578 करोड़ रुपये, वापस सरकारी खातों में जमा कर दिए.
हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को राज्य के बैंकिंग पार्टनर के रूप में पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही कथित अनधिकृत ट्रांसफर की जांच और राज्य बैंक नीति ढांचे की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई है.
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