तिरुमला, आंध्र प्रदेश: 2024 में जब पहली बार यह खबर सामने आई कि मशहूर तिरुपति लड्डू बनाने में मिलावटी घी होने की संभावना है, तो आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण गुस्से में आ गए.
उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं धर्म के लिए सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार हूं. अपनी जिंदगी, अपना परिवार, अपना राजनीतिक करियर और अपना राजनीतिक पद.”
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी यानी वाईएसआरसीपी के कार्यकाल में भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले लड्डू घटिया सामग्री से बनाए गए थे. अमरावती में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित मंदिर की पवित्रता की रक्षा करते हुए अगर उनकी जान भी चली जाए तो उन्हें परवाह नहीं होगी.
इन बयानों की तीव्रता इस बात को दिखाती है कि यह मुद्दा उनके लिए और उन लाखों हिंदुओं के लिए कितना अहम था, जो इस सुझाव से हिल गए थे कि पवित्र लड्डू में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी की मिलावट हुई हो सकती है.
हर साल करीब तीन करोड़ हिंदू आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के तिरुमला स्थित इस मंदिर नगर में दर्शन करने आते हैं. हर दिन औसतन 3.5 लाख से 4 लाख लड्डू प्रसाद के रूप में भक्तों को दिए जाते हैं.
देशभर में नाराजगी को देखते हुए सरकार ने तुरंत पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में हालात संभालने का काम शुरू कर दिया.
सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को बुलाया गया और तिरुपति लड्डू के लिए घी की खरीद की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी बनाई गई.
सीबीआई की निगरानी में काम कर रही एसआईटी ने आखिर में पाया कि तिरुपति लड्डू के घी में जानवरों की चर्बी नहीं थी. इससे नायडू के पिछले वाईएसआरसीपी प्रशासन पर लगाए गए आरोप खारिज हो गए. हालांकि जांच में यह पुष्टि हुई कि 5,971 टन तथाकथित घी में वनस्पति तेलों की मिलावट थी. सप्लायर और कर्मचारियों की मिलीभगत से तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी टीटीडी को 234 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
YSRCP अब इन दावों के लिए माफी की मांग कर रही है और विजयवाड़ा समेत अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन कर रही है. 24 फरवरी को इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा हुई, जिसमें सत्तारूढ़ तेलुगु देशम गठबंधन के 10 विधायकों को बोलने के लिए कहा गया.

एसआईटी जांच के साथ-साथ, टीटीडी के प्रबंधन वाले मंदिर में आगम शास्त्र के नियमों के मुताबिक शुद्धिकरण पूजा भी कराई गई. आगम शास्त्र को हिंदू धार्मिक रीति-रिवाज और पूजा-पाठ करने की मार्गदर्शिका माना जाता है.
टीटीडी ने उन डेयरी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया और प्रतिबंधित कर दिया, जिन पर घी की प्रोसेसिंग और बिक्री में गड़बड़ी के आरोप थे. ये आरोप कथित तौर पर पिछली सरकार के दौरान लगे, जिसका नेतृत्व वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के संस्थापक वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी कर रहे थे.
पार्टी प्रमुख, उनके चाचा वाई.वी. सुब्बा रेड्डी जो उस समय टीटीडी बोर्ड के चेयरमैन थे, और उनके कार्यकाल में टीटीडी का नेतृत्व करने वाले प्रशासकों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है.
इसके बाद से नायडू सरकार लगातार सक्रिय है और लोगों का भरोसा दोबारा बहाल करने के लिए प्रक्रियाओं और नीतियों में बड़े बदलाव कर रही है.
मिलावट को हटाने और फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSSAI) के स्टैंडर्ड को पूरा करने वाले सर्टिफाइड सप्लायर्स से घी की नई सोर्सिंग से जो शुरुआत हुई, वह पुराने प्रोसेस और बेकार पॉलिसीज़ की एडमिनिस्ट्रेटिव सफ़ाई में बदल गई.
टीटीडी का पुनर्गठन करने, प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा करने, कच्चे माल की पूरी खरीद प्रक्रिया में बदलाव करने और जांच व भंडारण व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने तक सरकार ने भरोसा बहाल करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

टीटीडी के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी च. वेंकैय्या चौधरी ने दिप्रिंट से कहा, “योजना और खरीद से लेकर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और मंदिर की सुरक्षा तक हर विभाग की हमारी व्यवस्थाओं को दोबारा डिजाइन किया गया है. इसमें भक्तों और हमारे दानदाताओं के प्रति पारदर्शिता और जवाबदेही को ध्यान में रखा गया है.”
टीटीडी के विभागों में सुधार
सरकार ने भगवान वेंकटेश्वर को लड्डू बनाने और चढ़ाने की 300 साल पुरानी परंपरा की रक्षा के लिए सभी विभागों की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं.
तेलुगु देशम के नेतृत्व वाली सरकार के तहत नए चुने गए टीटीडी चेयरमैन बी.आर. नायडू के नेतृत्व में आईएएस अधिकारी जे. श्यामला राव को सिस्टम की “सफाई” के लिए कार्यकारी अधिकारी बनाया गया.
अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी और सहायक सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी के नए पदों पर नियुक्तियां की गईं. इससे साफ संकेत मिला कि प्रशासन के शीर्ष स्तर में बदलाव किया जा रहा है.
कुछ ही समय बाद खरीद, मार्केटिंग, स्टोरेज और सुरक्षा विभागों के प्रमुखों को दक्षता बढ़ाने की योजना पेश करने के लिए बुलाया गया. हर विभाग के लिए नया बजट मंजूर किया गया और हर हफ्ते प्रगति रिपोर्ट कैबिनेट को दी जाने लगी.
बदलाव सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल और नए बजट तक सीमित नहीं थे. अधिकारियों ने लड्डू बनाने और बांटने की पूरी प्रक्रिया में बदलाव किया.
यह प्रक्रिया बहुत बड़ी है. हर विभाग में सैकड़ों लोगों के साथ काम करने से भी ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है.
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि टीटीडी रोज 4 लाख लड्डू बनाने के लिए 10,000 से 15,000 किलो घी, 7 टन गैस, 10 टन बेसन, 10 टन चीनी, करीब 800 किलो काजू, 540 किलो किशमिश, 250 किलो इलायची और लगभग 500 किलो मिश्री इस्तेमाल करता है.
अलग से, अन्नप्रसादम केंद्र में लाखों भक्तों को केले के पत्ते पर मुफ्त भोजन परोसने के लिए करीब 15 टन चावल और लगभग 8 टन सब्जियां इस्तेमाल होती हैं.
श्रीवारी पोटु यानी जहां प्रसाद तैयार होता है, उसके प्रमुख तिलक कुमार ने दिप्रिंट से कहा, “हमारी खरीद इतनी बड़ी होती है कि अगर हम तिरुपति शहर की हर किराना दुकान से सारा सामान खरीद लें, तब भी भारी कमी रह जाएगी.”
उन्होंने कहा, “इतने बड़े स्तर पर सामग्री की शुद्धता बनाए रखने में सिर्फ मशीनें ही मदद कर सकती हैं.”
मुख्य भंडारण केंद्र, जिसे उग्रणम कहा जाता है, जहां से प्रक्रिया शुरू होती है, वहीं से बदलाव की शुरुआत हुई.
हर दिन बनने वाले प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली 60 से ज्यादा चीजों को छांटने और ग्रेड करने के लिए 75 लाख रुपये की लागत से दो नई मशीनें खरीदी गईं.
जेन कंट्रोल्स इंडिया की कन्वेयर बेल्ट हर आकार और आकार की सामग्री को छांटती और ग्रेड करती है. यह सुगंधित मसालों और लौंग की बोरियों की घनत्व, रंग या आकार में किसी भी गड़बड़ी की जांच करती है. कंप्यूटर में सेट मानकों से मेल न खाने वाली चीजों को अलग कर देती है.
भंडारण और चींटियों व चूहों से बचाव के लिए गुड़, बादाम और इमली को वागाबाड़ी यानी गोदाम में ठंडे कमरों में रखा जाता है. इनके साथ चावल, आटा और अन्य सामान भी रखा जाता है.
नई व्यवस्था के तहत मंदिर के बाहरी हिस्से में सिर्फ 10 दिन का स्टॉक रखा जाता है और गर्भगृह के पास अंदरूनी हिस्से में सिर्फ 2 दिन का स्टॉक रखा जाता है.
साफ-सफाई के मानकों को बनाए रखने के लिए एडवांस ट्रे क्लीनिंग यूनिट मशीन का इस्तेमाल होता है. इससे घी और चिकनाई हटाकर रोज 12,000 ट्रे भाप से साफ की जाती हैं. इसके बाद उनमें लड्डू रखकर गर्भगृह से 64 लड्डू काउंटरों तक भेजा जाता है.
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा सामग्री की जांच है.
मौजूदा लैब को दिसंबर 2024 में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी NDDB द्वारा भेजे गए नए उपकरणों से अपग्रेड किया गया. यह मिलावट की खबरों के कुछ महीने बाद हुआ.
अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि टीटीडी ने देशभर की लैब से जांच उपकरण खरीदने पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए.
रंग, गंध, स्वाद, बनावट और रूप की जांच के अलावा अलग-अलग डेयरी यूनिट से आए घी में मिलावट, प्रिजर्वेटिव और किसी भी तरह के मिलावटी तत्वों की जांच की जाती है.
2024 के बाद टीटीडी लैब में फैटी एसिड संरचना की जांच भी शुरू की गई.
इन-हाउस लैब के प्रमुख लक्ष्मीनारायण रेड्डी ने दिप्रिंट से कहा कि अब हर दूसरे दिन घी के नमूने जांचे जाते हैं. घी लाने वाले टैंकरों को लैब की पूरी जांच प्रक्रिया पास करने के बाद ही स्टोरेज यूनिट में भेजा जाता है.
दिसंबर 2024 में कर्मचारियों की थकान न हो, इसके लिए लैब की ताकत लगभग दोगुनी कर दी गई.
पुरानी लैब के पास 19.75 करोड़ रुपये की लागत से एक नई लैब बनाई जा रही है. इसे NDDB, FSSAI और नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज यानी एनएबीएल से ट्रिपल सर्टिफिकेशन मिलेगा.
हर तिमाही टीटीडी लैब के नतीजे इन संस्थानों को क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाएंगे.
रेड्डी ने कहा, “जब कुछ महीनों में नई FSSAI लैब तैयार हो जाएगी, तो हर पैरामीटर के लिए अलग विश्लेषक होगा. अभी जो नियम लागू हैं, उनके अलावा सभी कानूनी प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. अब तक जो नहीं किया गया, वह भी होगा, यानी लड्डू के पोषण मूल्य की जांच भी की जाएगी.”
टीटीडी प्रशासन के आलोचकों ने इन-हाउस लैब द्वारा खुद सर्टिफिकेशन पर सवाल उठाए हैं. लेकिन पूर्व कार्यकारी अधिकारियों का कहना है कि बाहरी लैब के नतीजों पर निर्भर रहने से स्टॉक की सामग्री के इस्तेमाल और निस्तारण में देरी हो सकती है.
घी खरीद के लिए दोबारा टेंडर
मार्केटिंग, स्टोरेज और टेस्टिंग विभागों में प्रशासनिक बदलाव के बाद खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया.
घी इस पूरे विवाद का केंद्र था. इसी वजह से टीटीडी और उसके 30,000 स्थायी और संविदा कर्मचारियों पर जांच हुई.
घी खरीदने के प्रोसेस में मुख्य बदलावों में ट्रांसपोर्टेशन के दौरान घी की क्वालिटी बनाए रखना शामिल है.
यह पक्का करने के लिए कि ट्रांसपोर्टेशन के दौरान यह खराब न हो, पहले की कलेक्शन रेंज 1,500 km थी, जिसे घटाकर 800 km कर दिया गया है.
घी ट्रांसपोर्ट करने वाले टैंकरों के लिए ज़रूरी GPS लॉक सिस्टम के ज़रिए टेक्निकल मॉनिटरिंग की जाती है.
बी.आर. नायडू ने दिप्रिंट से कहा, “जब दोबारा टेंडर किया गया, तो 2024 और 2025 के बीच सात चरणों में टेंडर प्रक्रिया हुई. कुल चार कंपनियां घी सप्लाई के लिए योग्य ठहरीं.”
उन्होंने कहा, “जिन डेयरी कंपनियों को टेंडर मिला, उन्होंने FSSAI और NDDB के सभी मानकों के अनुसार टेस्ट पास किए. घी की कीमत भी NDDB विशेषज्ञों की सिफारिश के मुताबिक तय की गई. टेंडर आवंटन पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ.”
टेंडर प्रक्रिया में बदलाव और नियम सख्त करने का असर लगभग तुरंत दिखा.
टीटीडी ने जनवरी में लड्डू की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की. मंदिर प्रशासन ने कहा कि 2025 में 13.52 करोड़ लड्डू बिके, जो 2024 के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा है.
अब रोज औसतन 4 लाख लड्डू बनाए जा रहे हैं ताकि बढ़ती मांग पूरी की जा सके. मंदिर अधिकारियों ने कहा कि यह भक्तों के प्रशासन पर दोबारा भरोसा जताने का संकेत है.
साधारण प्रसाद लड्डू का वजन 175 ग्राम होता है और कीमत 50 रुपये है. बड़ा लड्डू 700 ग्राम का होता है और 100 रुपये में मिलता है.
इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर
भगवान वेंकटेश्वर भले ही मंदिर के मुख्य आकर्षण हों, लेकिन मंदिर परिसर के बीच बना अत्याधुनिक एआई से लैस कमांड सेंटर टीटीडी के बदलाव की पहल का असली केंद्र है.
इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC तीर्थयात्री प्रबंधन, प्रसाद वितरण, मंदिर की समय-सारणी प्रबंधन और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी ज्यादातर गतिविधियों को एक साथ जोड़ता है.

ICCC टीटीडी के सुपरवाइजर, मैनेजर और अधिकारियों को विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने, निगरानी बढ़ाने और जल्दी फैसले लेने में मदद करता है. इससे अधिकारी एक ही डैशबोर्ड से इतनी बड़ी व्यवस्था पर नजर रख सकते हैं और उसे संभाल सकते हैं.
मंदिर परिसर के 6,000 कैमरों और 300 केंद्रों से आने वाला डेटा रियल टाइम में मैप और विश्लेषण किया जाता है.
ICCC की योजना 2025 के वार्षिक ब्रह्मोत्सव से पहले बनाई गई थी और उसी साल सितंबर तक यह चालू हो गया.
इस परियोजना की कल्पना और इसे लागू करने का काम फॉर्सिस इंक और उसके संस्थापक जया प्रसाद वेजेंदला ने किया. उन्हें इस परियोजना का मुख्य वास्तुकार माना जाता है.
वेजेंदला और 10 अन्य दानदाताओं ने 35 करोड़ रुपये की लागत से इस पूरे आईसीसीसी यूनिट को सिर्फ 30 दिनों में शून्य से तैयार किया.
मंदिर परिसर के सुरक्षा अधीक्षक गुरप्पा, जो करीब 30 साल से टीटीडी के साथ काम कर रहे हैं, ने कहा, “पहले सब कुछ अंदाज और अनुभव पर चलता था. आज तिरुमला के 26 किलोमीटर के पूरे मंदिर नगर के हर वर्ग इंच पर हमारी नजर है.”
टीटीडी देश का पहला मंदिर प्रबंधन निकाय है जिसने मंदिर संचालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़ा है. ICCC को “मंदिर शासन का ग्लोबल मॉडल” बताया जा रहा है.
आईटी और रियल टाइम गवर्नेंस मंत्री नारा लोकेश ने कहा, “इस पहल ने टीटीडी को बदल दिया है. अब रियल टाइम शासन, पहले से फैसले लेना और डेटा आधारित सार्वजनिक सेवा संभव हुई है.”
टीटीडी बोर्ड सदस्य भानुप्रकाश रेड्डी ने द प्रिंट से कहा कि मंदिर प्रशासन में अंदरूनी और बाहरी किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए बड़े सिस्टम स्तर के बदलाव भी किए जा रहे हैं.
रेड्डी ने कहा, “इस बदलाव में आस्था उतनी ही अहम है जितनी तकनीकी दखल और प्रशासनिक सुधार.”
टीटीडी के कर्मचारी भी अब ज्यादा सतर्क हैं.
पिछले दो साल में 6,000 कर्मचारियों को अच्छा वेतन बढ़ोतरी दी गई है. टीटीडी को उम्मीद है कि खुशहाल कार्य वातावरण से भक्तों की संतुष्टि बढ़ेगी.
टीटीडी देशभर में 64 मंदिरों का प्रबंधन करता है और 2026-27 के लिए उसका बजट 5,400 करोड़ रुपये से ज्यादा है.
रेड्डी अपने प्रशासनिक काम के लिए जल्दी निकलते हुए कहते हैं, “तिरुपति में हम सबके लिए यह घटना, यह चर्चा और यह बदनामी व्यक्तिगत है.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मेरा मानना है कि दैव प्रीति यानी भगवान के प्रति प्रेम उतना ही जरूरी है जितना पाप भीति यानी गलत काम का डर, ताकि व्यवस्था में ज्यादा जवाबदेही लाई जा सके.”
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