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Tuesday, 24 February, 2026
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बेनामी अधिनियम के तहत कुर्की को केवल तय प्राधिकारियों के समक्ष चुनौती दी जा सकती है: न्यायालय

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नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एनसीएलएटी के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 (बेनामी अधिनियम) के तहत कुर्की को केवल उस अधिनियम के तहत निर्धारित प्राधिकारियों के समक्ष ही चुनौती दी जा सकती है।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल चंदुरकर की पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि अपीलकर्ताओं को बेनामी अधिनियम के तहत पारित कुर्की आदेश को दिवालियापन और दिवालिया संहिता के तहत वैधानिक अधिकारियों के समक्ष चुनौती देने का अधिकार नहीं था। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि ऐसा करना सद्भावनापूर्ण नहीं है और वास्तव में बेनामी अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार करने और बाधित करने के इरादे से किया गया है।’

पीठ ने कहा, ‘‘ इसके अलावा, एनसीएलटी के समक्ष अपील दायर करना, जबकि यह पाया गया है कि उचित मंच एनसीएलटी नहीं, बल्कि बेनामी अधिनियम के तहत वैधानिक प्राधिकरण हैं, प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग है। अपीलकर्ताओं ने एनसीएलटी, एनसीएलटी और इस न्यायालय का बहुमूल्य समय बर्बाद किया है, जबकि कानून की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और बेनामी अधिनियम के तहत वैधानिक उपायों की उपलब्धता के बारे में कोई संदेह नहीं है।’’

न्यायालय ने निर्देश दिया है कि यह राशि आज से चार सप्ताह के भीतर ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन’ के पास जमा कर दी जाए।

यह फैसला राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलएटी) की चेन्नई पीठ द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों पर आया है, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया गया था।

भाषा

शोभना दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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