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Monday, 23 February, 2026
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नाबालिगों से यौन उत्पीड़न आरोप: प्रयागराज POCSO कोर्ट ने धार्मिक नेताओं पर FIR का दिया आदेश

दो धार्मिक व्यक्तियों पर नाबालिगों के साथ जबरन यौन उत्पीड़न का आरोप है. स्पेशल कोर्ट ने कथित निष्क्रियता को लेकर स्थानीय पुलिस और कमिश्नर को भी फटकार लगाई.

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नई दिल्ली: प्रयागराज की एक विशेष POCSO कोर्ट ने नाबालिगों के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद धार्मिक नेता अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.

यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने शनिवार को दिया और कहा कि राज्य के लिए गंभीर संज्ञेय अपराधों, खासकर POCSO एक्ट से जुड़े मामलों की जांच करना अनिवार्य है.

अविमुक्तेश्वरानंद मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम के निवासी हैं और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम स्थित शेषनाथ आश्रम से जुड़े हैं.

यह कानूनी कार्रवाई शिकायतकर्ता—अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा शुरू की गई, जिन्होंने कोर्ट में दो पीड़ितों की ओर से याचिका दायर की. आदेश में उन्हें ‘Victim A’ (उम्र 14 साल) और ‘Victim B’ (उम्र 17 साल 6 महीने) बताया गया है.

दोनों नाबालिग पीड़ितों ने शिकायतकर्ता को बताया कि प्रयागराज में 2025–26 के माघ मेले के दौरान उनके साथ यौन शोषण और जबरन यौन उत्पीड़न किया गया.

बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दायर आवेदन में साफ आरोप लगाया गया कि पीड़ितों के साथ जबरन यौन उत्पीड़न हुआ.

कोर्ट ने यह भी कहा कि ये अपराध “धार्मिक सेवा और शिष्य बनाने के नाम पर” इन दोनों धार्मिक नेताओं और 2–3 अन्य अज्ञात लोगों द्वारा किए गए.

शिकायत में यह भी कहा गया कि नामजद धार्मिक नेताओं के अलावा 2–3 अज्ञात लोग भी इस घटना में शामिल थे और उनकी पहचान और भूमिका की जांच ज़रूरी है.

जब प्रयागराज जिले के झूंसी थाने की पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने भी कोई कार्रवाई नहीं की, तब शिकायतकर्ता अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने नाबालिग पीड़ितों की ओर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट के 7 फरवरी के निर्देश पर प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को जांच का आदेश दिया गया, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने जांच रिपोर्ट सौंपी.

रिपोर्ट में कहा गया कि जांच के दौरान स्वतंत्र गवाहों और दोनों पीड़ितों से पूछताछ की गई, जिन्होंने जांच अधिकारी को 18 जनवरी के आसपास हुए कथित यौन उत्पीड़न के बारे में बताया.

कोर्ट ने पाया कि अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं.

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जांच और ट्रायल के दौरान बच्चे की पहचान किसी भी समय उजागर नहीं की जाएगी.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक शिकायतकर्ता के वकीलों ने कहा: “आज कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद जैसे गंभीर अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश उन नाबालिग बच्चों के लिए दिया गया है. पहली नजर में हमें न्याय मिला है.”

यह एफआईआर दर्ज करने का आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(4) के तहत दिया गया है, जो मजिस्ट्रेट या स्पेशल कोर्ट को आरोपों और सबूतों की जांच कर कानून के अनुसार उचित आदेश देने का अधिकार देता है. इसका मतलब यह है कि कोर्ट परिस्थितियों के अनुसार आवेदन को शिकायत मानकर भी कार्रवाई कर सकती है.


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