नई दिल्ली: बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ लेने के कुछ दिनों बाद, देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार और देश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उन्हें किनारे कर दिया और यहां तक कि असंवैधानिक तरीके से उन्हें पद से हटाने की “साजिश” भी रची.
उन्होंने पिछली हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के नेताओं पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति भवन बंगाभवन का घेराव एक सोची-समझी चाल थी.
शाहाबुद्दीन ने ये आरोप सोमवार को बांग्ला अखबार कालेर कंठो को दिए इंटरव्यू में लगाए.
शाहाबुद्दीन ने कहा कि अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल के दौरान उनका यूनुस से लगभग कोई संपर्क नहीं था और उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें राष्ट्रपति पद से अलग-थलग कर दिया गया. उन्होंने जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के बाद के समय को “कई तरह की साजिशों” का दौर बताया, जिसका मकसद “संवैधानिक खालीपन” पैदा करना और बांग्लादेश को स्थायी रूप से अस्थिर करना था.
राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि, उन्होंने ही संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की थी, जिससे यूनुस को मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया, लेकिन बाद में दोनों के रिश्ते खराब हो गए.
उन्होंने कहा, “मुख्य सलाहकार ने बाद में मेरे साथ उस तरह समन्वय नहीं किया. इसे समझाने का वास्तव में कोई तरीका नहीं है क्योंकि वह कभी मेरे पास नहीं आए. उन्होंने मुझे पूरी तरह छिपाने की कोशिश की.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय चुनाव से पहले बांग्लादेश और अमेरिका के बीच कथित टैरिफ समझौते के बारे में उन्हें जानकारी दी गई थी, तो शाहाबुद्दीन ने साफ कहा, “नहीं, मुझे कुछ भी नहीं पता. ऐसे राज्य समझौते की जानकारी मुझे दी जानी चाहिए थी.”
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने ऐसा किया था, लेकिन यूनुस ने ऐसा नहीं किया. “उन्होंने न तो मौखिक रूप से बताया और न ही लिखित रूप में.”
बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार ने उनकी विदेश यात्रा दो बार रोकी. एक यात्रा पिछले दिसंबर कोसोवो जाने की थी, जहां उन्हें मुख्य भाषण देने के लिए बुलाया गया था और दूसरी कतर के अमीर के निमंत्रण पर एक सम्मेलन में शामिल होने की थी.
उन्होंने आगे कहा कि यूनुस ने संविधान के उस प्रावधान का भी पालन नहीं किया, जिसमें विदेश यात्रा के बाद राष्ट्रपति को जानकारी देना ज़रूरी होता है.
शाहाबुद्दीन ने कहा, “संविधान में कहा गया है कि जब भी वह विदेश यात्रा से लौटेंगे, तो राष्ट्रपति से मिलेंगे और बताएंगे कि क्या चर्चा हुई, कोई समझौता हुआ या नहीं.”
उन्होंने कहा कि यूनुस 14-15 बार विदेश गए, लेकिन “उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया. वह कभी मेरे पास नहीं आए.”
यह पहली बार नहीं है जब शाहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार पर आरोप लगाए हैं.
दिसंबर 2025 में रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह फरवरी के संसदीय चुनाव के बाद अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा देना चाहते हैं. उन्होंने इसके लिए यूनुस सरकार के दौरान हुए “अपमान” और अलग-थलग किए जाने को कारण बताया था.
उन्होंने कहा था कि यूनुस करीब सात महीने तक उनसे नहीं मिले, उनका प्रेस विभाग उनसे ले लिया गया और विदेशों में बांग्लादेश के दूतावासों से उनकी आधिकारिक तस्वीरें हटा दी गईं.
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद ज्यादातर औपचारिक होता है, जबकि असली कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास होती है. हालांकि, अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के छात्र आंदोलन के बीच ढाका छोड़कर नई दिल्ली आने के बाद राष्ट्रपति का पद असामान्य रूप से महत्वपूर्ण हो गया था. उस समय संसद भंग हो गई थी और शाहाबुद्दीन ही एकमात्र संवैधानिक प्राधिकारी रह गए थे.
शाहाबुद्दीन 2023 में बिना विरोध के राष्ट्रपति चुने गए थे. वह हसीना की पार्टी अवामी लीग के उम्मीदवार थे, जिसे बाद में इस महीने चुनाव लड़ने से रोक दिया गया.
‘अंतरिम सरकार ने साजिश की’
राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने कालेर कंठो को बताया कि उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए बार-बार असंवैधानिक कोशिशें की गईं.
उन्होंने कहा, “उन डेढ़ साल के दौरान, मैं किसी भी चर्चा का हिस्सा नहीं था, फिर भी मेरे खिलाफ कई साजिशें रची जा रही थीं.”
उन्होंने आगे कहा कि देश की शांति और व्यवस्था को स्थायी रूप से नष्ट करने और “संवैधानिक खालीपन” पैदा करने की “कई कोशिशें” की गईं.
जब उनसे पूछा गया कि क्या ये कोशिशें सफल हुईं, तो उन्होंने कहा: “मैं अपने फैसले पर अडिग था. इसलिए कोई भी साजिश सफल नहीं हुई. खासकर राष्ट्रपति को असंवैधानिक तरीके से हटाने की कई साजिशें नाकाम हो गईं.”
शाहाबुद्दीन, जिन्होंने अवामी लीग सरकार के पतन के बाद मुहम्मद यूनुस को पद की शपथ दिलाई थी, उन्होंने अपने खिलाफ हुए प्रदर्शनों की तस्वीर को “डरावना” बताया.
उन्होंने याद करते हुए कहा कि 22 अक्टूबर 2024 को बंगाभवन को चारों तरफ से घेर लिया गया था.
उन्होंने कहा, “यह पार्टी, वह मंच, वह एकता—क्या-क्या नहीं! सब कुछ रातों-रात बना दिया गया. ये सभी एक ही तरह के लोग हैं, अलग-अलग मंचों पर, अलग-अलग नाम से. उनके पास इतना पैसा कहां से आया?”
उस समय प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन में घुसने की कोशिश की थी और उनके इस्तीफे की मांग की थी. इसकी वजह उनका बांग्ला अखबार मानव जमिन को दिया गया बयान था.
राष्ट्रपति ने तब कहा था कि उनके पास कोई दस्तावेज़ी सबूत नहीं है कि शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ने से पहले औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया था.
शाहाबुद्दीन के अनुसार, उस समय सेना ने उन्हें तीन-स्तरीय सुरक्षा दी थी.
उन्होंने कहा, “वह रात मेरे लिए डरावनी थी. गणभवन (प्रधानमंत्री आवास) की तरह, वे बंगाभवन को भी लूटना चाहते थे. हम घर पर थे. हमारे पास और कुछ नहीं है, तो क्या मैं यहां से भाग जाऊं?”
उन्होंने कहा कि वह अपने फैसले पर डटे रहे.
“मैंने कहा, अगर बंगाभवन में मेरा खून बहता है, तो बहने दो. मैं भी इतिहास का हिस्सा बन जाऊंगा, लेकिन मैं संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा करूंगा—मैं इस फैसले पर अडिग था.”
इसके बाद शाहाबुद्दीन ने सीधे अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि उसने उनकी जगह एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाने की कोशिश की.
उन्होंने कहा, “आज मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश की.”
राष्ट्रपति के अनुसार, पूर्व मुख्य सलाहकार ने उस जज के साथ एक घंटे की बैठक की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.
उन्होंने साफ कहा, “वह राष्ट्रपति हैं, संविधान के अनुसार सबसे ऊपर हैं. मैं असंवैधानिक तरीके से उस पद पर नहीं बैठ सकता.”
शाहाबुद्दीन ने कहा कि उन्हें इन कोशिशों की जानकारी न्यायपालिका में अपने संपर्कों से मिली.
‘BNP और सेना मेरे साथ खड़ी रही’
पूरे इंटरव्यू के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने बार-बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को उनका समर्थन करने का श्रेय दिया.
उन्होंने कहा कि “बीएनपी का शीर्ष नेतृत्व मेरे साथ था,”
और खास तौर पर इसके अध्यक्ष तारिक रहमान का नाम लिया, जो अब प्रधानमंत्री हैं.
उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ बीएनपी नेता ने उनसे कहा: “हम संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं. हम राष्ट्रपति को असंवैधानिक तरीके से हटाने के पक्ष में नहीं हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे मुश्किल समय में बीएनपी का सहयोग 100 प्रतिशत था.”
उन्होंने सेना की भी तारीफ की, जिसने उन्हें सुरक्षा दी.
उन्होंने कहा कि सेना ने उनसे कहा: “महामहिम, आप सशस्त्र बलों के प्रमुख हैं. आपकी हार का मतलब पूरे सशस्त्र बलों की हार है. हम इसे किसी भी कीमत पर रोकेंगे.”
उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने साफ कर दिया था कि वे “कोई भी असंवैधानिक गतिविधि नहीं होने देंगे.”
उन्होंने यह भी कहा कि एक समय ऐसा लगा कि उन्हें हटाने की कोशिश सफल हो जाएगी, लेकिन आखिर में यह योजना “अपने-आप शांत हो गई.”
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