वाराणसी: कथित यौन उत्पीड़न मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गिरफ्तार करने के लिए उनके आवास पर पहुंची.
मीडिया से बात करते हुए स्वामी ने कहा कि वह किसी भी तरह से पुलिस का विरोध नहीं करेंगे और पूरा सहयोग करेंगे.
शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें तीन अदालतों पर विश्वास है—जनता, उनका अपना दिल और भगवान और इन तीनों से उन्हें क्लीन चिट मिली है.
उन्होंने कहा, “हम किसी भी तरह से पुलिस का विरोध नहीं करेंगे, हम सहयोग करेंगे. पुलिस जो भी कर रही है, जनता सब देख रही है. देखिए, हमारे लिए तीन अदालतें हैं. एक निचली अदालत, एक बीच की अदालत और एक सुप्रीम कोर्ट. निचली अदालत जनता है—लोग सब देख रहे हैं और वही फैसला देंगे. बीच की अदालत हमारा अपना दिल है—हम अपने दिल से जानते हैं कि हम गलत हैं या नहीं. और तीसरी भगवान की अदालत है—वह भी देख रहे हैं कि कौन सही है और कौन गलत. ऐसे में हमें तीनों अदालतों से क्लीन चिट मिली है.”
यह मामला पिछले हफ्ते सामने आया था, जब विशेष POCSO कोर्ट के निर्देश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.
पुलिस ने बताया कि कोर्ट के आदेश मिलने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे केस दर्ज किया गया और कानूनी निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की गई.
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 351(3) और पॉक्सो एक्ट, 2012 की धारा 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 के तहत दर्ज की गई है.
आरोप 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की घटनाओं से जुड़े हैं. शिकायत में नाबालिगों से जुड़े यौन अपराध के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
यह आदेश विशेष न्यायाधीश (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया. कोर्ट ने शिकायत, दो कथित पीड़ितों के बयान, स्वतंत्र गवाहों की गवाही और प्रयागराज के सहायक पुलिस आयुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज करने और कानून के अनुसार आगे कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
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