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Monday, 23 February, 2026
होमदेशदेवूजी और संघराम का सरेंडर: 31 मार्च से पहले ही माओवादी लीडरशिप स्ट्रक्चर खत्म होने की कगार पर

देवूजी और संघराम का सरेंडर: 31 मार्च से पहले ही माओवादी लीडरशिप स्ट्रक्चर खत्म होने की कगार पर

बैन CPI (माओवादी) को एक बड़ा झटका देते हुए, इसके टॉप नेताओं, जिसमें असल में चीफ देवूजी भी शामिल हैं, ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है, अब सेंट्रल कमेटी का सिर्फ़ एक एक्टिव मेंबर बचा है.

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नई दिल्ली: प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) और उसके संगठन के लिए यह अंतिम झटका माना जा रहा है. केंद्रीय समिति के बचे हुए सदस्य तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर चुके हैं.

इनमें सबसे अहम नाम थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवुजी का है. वह पिछले साल मई में पूर्व महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू के मारे जाने के बाद कई महीनों से संगठन के वास्तविक महासचिव के रूप में काम कर रहे थे.

यह घटनाक्रम देश में वामपंथी उग्रवाद खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा तय 31 मार्च की समय सीमा से एक महीने पहले हुआ है.

देवुजी के साथ माओवादी संगठन की शीर्ष निर्णय लेने वाली समिति के दूसरे सदस्य माला राजी रेड्डी उर्फ ​​संघराम ने भी हथियार डाल दिए हैं.

देवुजी का सरेंडर तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह अंत तक सरेंडर के खिलाफ थे और आखिरकार मजबूर होकर उन्होंने यह कदम उठाया.

पहले रिपोर्ट में बताया गया था कि सरेंडर के मुद्दे पर प्रतिबंधित संगठन के वरिष्ठ कैडर में गहरी फूट थी. देवुजी इसके खिलाफ थे, जबकि उनके समकालीन मल्लूजोला वेणुगोपाल उर्फ भूपति सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर करना चाहते थे.

देवुजी सरेंडर के इतने खिलाफ थे कि उन्होंने राजनीतिक विंग के प्रमुख सोनू को मारने की धमकी दी थी, जिसने अक्टूबर में सरेंडर किया था.

एक पुलिस अधिकारी ने पहले बताया था, “सोनू ने जब देवुजी से सरेंडर की बात कही तो वह इतना नाराज हुआ कि उसने सोनू को संदेश भेजा कि अगर उसे हथियार डालने और सरेंडर करने के लिए मजबूर किया गया तो वह उसी हथियार से सोनू को मार देगा.”

देवुजी और संग्राम के सरेंडर के बाद अब संगठन में केंद्रीय समिति का सिर्फ एक सक्रिय सदस्य बचा है. जनवरी पिछले साल तक इस समिति में 17 सदस्य थे.

सूत्रों के मुताबिक मिसिर बेसरा ही एकमात्र केंद्रीय समिति सदस्य हैं जो अभी सक्रिय हैं और झारखंड और ओडिशा में फैले सारंडा जंगल में छिपे हुए हैं.

दूसरे केंद्रीय समिति सदस्य मुप्पला लक्ष्मणा राव अब “सठिया” चुके हैं और पार्टी के कामकाज में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लेते, अधिकारियों ने कहा.

बाकी सभी केंद्रीय समिति सदस्य पिछले एक साल में या तो सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए हैं या उन्होंने सरेंडर कर दिया है.

भूपति, जो मारे गए माओवादी नेता और विचारक मल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के छोटे भाई हैं, ने पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र पुलिस के सामने गढ़चिरोली जिले में सरेंडर किया था.

उनसे पहले एक और वरिष्ठ माओवादी नेता पोथुला पद्मावती उर्फ सुजाता ने पिछले साल सितंबर में तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर किया था. सुजाता किशनजी की पत्नी हैं और उन्होंने 43 साल तक आंदोलन के साथ समय बिताया था.

इसके एक महीने बाद अक्टूबर में केंद्रीय समिति के एक और सदस्य पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर किया, जिससे संगठन को बड़ा झटका लगा. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार चंद्रन्ना “लॉजिस्टिक्स और देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपे केंद्रीय समिति सदस्यों के बीच संपर्क का काम देखने वाले अहम व्यक्ति” थे.

देवुजी के सरेंडर से पहले चंद्रन्ना का सरेंडर तेलंगाना में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जा रहा था.

शनिवार को देवुजी ने 18 अन्य भूमिगत कैडर के साथ तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी के सामने सरेंडर किया. इसे देश में हिंसक माओवादी आंदोलन खत्म करने की दिशा में अहम मोड़ बताया गया है.

पिछले महीने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी, जो सीपीआई (माओवादी) की सैन्य शाखा है, के एक और प्रमुख नेता ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर किया था. देवुजी मारे गए माओवादी कमांडर मडवी हिडमा के करीबी और शिष्य माने जाते थे. हिडमा पिछले साल नवंबर में आंध्र प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे.

देवा के सरेंडर के बाद तेलंगाना के DGP बी. शिवधर रेड्डी ने कहा कि पूरी पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी खत्म हो गई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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