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Saturday, 21 February, 2026
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भारत का ‘सिलिकॉन बीच’: जब बेंगलुरु लड़खड़ा रहा है, तब कर्नाटक के तट पर उभर रहा है नया आईटी हब

मंगलुरु, उडुपी और दक्षिण कन्नड़ के तटीय इलाके को अब भारत का ‘सिलिकॉन बीच’ कहा जाता है, जहां सैकड़ों टेक कंपनियां अपना कारोबार शुरू कर रही हैं.

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मैंगलुरु-उडुपी: नमित पद्मराज 12 साल से सिंगापुर में काम कर रहे थे, जब उन्हें एक ऐसा ऑफर मिला जिसे वह मना नहीं कर सकते थे. अमेरिकी ऑडियो सॉल्यूशंस कंपनी बोस प्रोफेशनल ने उनसे कहा कि वह एक नई प्रोडक्ट लाइन बिल्कुल शुरुआत से तैयार करें. साथ ही कंपनी ने उनसे अपनी नई यूनिट के लिए जगह भी चुनने को कहा. यह बोस प्रोफेशनल की अमेरिका के बाहर पहली यूनिट थी.

“पहले उन्होंने बेंगलुरु का सुझाव दिया, लेकिन मुझे लगा कि मैं सिंगापुर में ही बेहतर हूं. आरएंडडी के लिए सबसे जरूरी चीज लंबी अवधि की प्रतिबद्धता होती है,” पद्मराज कहते हैं.

पद्मराज बेंगलुरु में काम कर चुके थे, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है. वह वहां की चुनौतियों से अच्छी तरह वाकिफ थे. उन्हें पता था कि शहर में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और ज्यादा नौकरी बदलने की प्रवृत्ति आरएंडडी के लिए जरूरी लंबी प्रतिबद्धता के खिलाफ जाती है.

इसके बाद उन्होंने कर्नाटक के तटीय शहर मैंगलुरु का सुझाव दिया.

कई सालों से इस बंदरगाह शहर की अर्थव्यवस्था रिफाइनरी, शिपिंग से जुड़े कारोबार, मछली पालन और कृषि पर आधारित रही है.

लेकिन उडुपी जिले के कार्कल के पास पले-बढ़े पद्मराज को भरोसा था कि मैंगलुरु बेहतर विकल्प है. यहां अच्छा टैलेंट पूल है, जीवन की गुणवत्ता अच्छी है. खुली हवा वाला तटीय शहर है और ट्रैफिक भी सुचारु है.

उनके बॉस इस जगह को लेकर थोड़े चिंतित थे, लेकिन उन्होंने पद्मराज पर भरोसा किया.

नवंबर 2024 में उन्होंने लिंक्डइन पर नौकरी के विज्ञापन डालने शुरू किए. उन्होंने उन लोगों से भी संपर्क किया जो इस क्षेत्र के रहने वाले थे लेकिन बाहर काम कर रहे थे.

यह ऑफर बेचना मुश्किल नहीं था. परिवार के साथ ज्यादा समय, शुरुआत से प्रोडक्ट बनाने का मौका, अच्छी सैलरी और अच्छी जिंदगी.

जनवरी 2025 में पद्मराज ने भारत में बोस प्रोफेशनल के दूसरे कर्मचारी को नियुक्त किया. साल के अंत तक उनकी टीम 50 लोगों की हो गई.

अब यह टीम मैंगलुरु के कोटारा चौक में बने स्मार्ट नए ऑफिस से अमेरिकी कंपनी की नई प्रोडक्ट लाइन का लगभग पूरा सॉफ्टवेयर बना रही है.

बोस प्रोफेशनल कर्नाटक के तटीय क्षेत्र मैंगलुरु, उडुपी और दक्षिण कन्नड़ में काम करने वाली सैकड़ों बड़ी आईटी कंपनियों में से एक है. हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में आर्थिक उछाल आया है.

पद्मराज और बोस का फैसला सिर्फ एक सोच-समझकर लिया गया कदम नहीं था. यह एक संकेत भी था. वह क्षेत्रीय आंदोलन से जुड़ गए थे.

पहले मैंगलुरु और उडुपी के कॉलेजों से पढ़े सैकड़ों आईटी प्रोफेशनल्स को काम के लिए बाहर जाना पड़ता था. लेकिन अब उन्हें अपने घर के पास ही विकल्प मिल रहे हैं. इस क्षेत्र को अब भारत का ‘सिलिकॉन बीच’ कहा जा रहा है.

यह बदलाव उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नया जीवन दे रहा है, जो कई सालों से सांप्रदायिक राजनीति, बदले की हत्याओं, धार्मिक तनाव, मॉरल पुलिसिंग, सतर्कता और दूसरी चुनौतियों से प्रभावित रहा है.

अब इन पुरानी चुनौतियों से बेपरवाह, उद्यमियों, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स और व्यापक कारोबारी समुदाय का एक समूह क्षेत्र की आर्थिक पहचान को फिर से मजबूत करने के लिए एकजुट हो रहा है.

पिछले दो साल में आईटी से होने वाली आय 3,200 करोड़ रुपये से बढ़कर इस मार्च तक 5,000 करोड़ रुपये पार करने की ओर है. इसमें से करीब 3,000 करोड़ रुपये प्रोफेशनल्स की सैलरी के रूप में माने जा रहे हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में पैसा लाएंगे.

अब आईटी समुदाय 2034 तक 45,000 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रख रहा है और इस दौरान टेक प्रोफेशनल्स की संख्या लगभग 50,000 से बढ़ाकर 2,00,000 करने का लक्ष्य है.

Ajanta Business centre out of which Bose Professional, the only R&D centre of the global brand, works out of | Sharan Povanna/ThePrint
अजंता बिजनेस सेंटर, जिसमें से बोस प्रोफेशनल, ग्लोबल ब्रांड का एकमात्र R&D सेंटर काम करता है | शरण पोवन्ना/दिप्रिंट

पिछले तीन साल में इस क्षेत्र की तीन कंपनियों का अधिग्रहण ग्लोबल कंपनीज़ ने किया है. हर डील की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर रही है. इससे यहां विकसित हो रही तकनीक की गुणवत्ता का पता चलता है.

ऐतिहासिक रूप से, पूर्व दक्षिण कन्नड़ जिला, जिसे बाद में दक्षिण कन्नड़ नाम दिया गया, और जिसके केंद्र में मैंगलुरु है, उद्यमिता और शिक्षा की मजबूत परंपरा वाला क्षेत्र रहा है.

“हम विश्वास को फिर से जगाना चाहते हैं,” सीरियल उद्यमी, निवेशक और रोबोसॉफ्ट, 99गेम्स और वर्कवर्क के संस्थापक रोहित भट्ट ने दिप्रिंट से कहा.

‘कोस्टल बेंगलुरु’

एक तरफ पश्चिमी घाट और दूसरी तरफ साफ समुद्र तट के बीच बसा मैंगलुरु, दक्षिण कन्नड़ और उडुपी का क्षेत्र, जिसे ऐतिहासिक रूप से ‘तुलुनाडु’ कहा जाता है, मेहनती और आत्मनिर्भर होने के लिए जाना जाता है.

यह क्षेत्र अब आईटी पावरहाउस बन रहा है, क्योंकि यहां मिलने वाले फायदे के कारण टेक कंपनियां यहां आ रही हैं.

मैंगलुरु और उडुपी में लंबी दूरी तय करना भी आसान लगता है, जबकि बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों में छोटी दूरी तय करना भी मुश्किल हो जाता है. यहां सड़कों की गुणवत्ता भी बहुत बेहतर है.

इसे ‘15 मिनट सिटी’ कहा जाता है, क्योंकि औसतन 15 मिनट में कहीं भी पहुंचा जा सकता है, एयरपोर्ट सहित.

“मेरा रोज का सफर पांच से सात मिनट का है, जिसमें मैं अपनी बेटी को स्कूल छोड़ना भी शामिल है. मुंबई में मेरे सहकर्मियों के लिए यह अकल्पनीय है,” निवियस के सीईओ और सह-संस्थापक सुयोग शेट्टी कहते हैं. निवियस का अधिग्रहण पिछले फरवरी में ग्लोबल डिजिटल और आईटी सेवा कंपनी एनटीटी डेटा ने किया था.

मैंगलुरु के और भी फायदे हैं. यहां घर सस्ते हैं, संचालन लागत कम है, सैलरी कम है, नौकरी छोड़ने की दर 80 प्रतिशत कम है और इसे ‘सुरक्षित शहर’ का टैग मिला है.

उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि यहां ऑफिस स्पेस बेंगलुरु, पुणे या हैदराबाद से 30 प्रतिशत सस्ता है.

घर का किराया भी कम है. उदाहरण के लिए, पद्मराज 2000 वर्ग फुट के तीन बेडरूम वाले फ्लैट के लिए 35,000 रुपये किराया देते हैं, जो बेंगलुरु जैसे शहर की तुलना में बहुत कम है.

Niveus office in Mangaluru | Sharan Povanna/ThePrint
मंगलुरु में निवेयस का ऑफिस | शरण पोवन्ना/दिप्रिंट

शिक्षा भी ज्यादा सस्ती है. सीईओ बताते हैं कि शीर्ष स्कूलों में सालाना फीस 45,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक है. जबकि बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे शहरों में फीस कई लाख रुपये तक पहुंच जाती है.

उनका कहना है कि जीवन की गुणवत्ता भी बहुत बेहतर है.

“ऑटो ज्यादा किराया नहीं लेते, कर्मचारी दोपहर के खाने के लिए घर जाते हैं, और उनमें से कई अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहते हैं,” नोविगो के सह-संस्थापक मोहम्मद हनीफ कहते हैं. नोविगो का अधिग्रहण ब्लैकस्टोन पोर्टफोलियो कंपनी आर सिस्टम्स ने किया था.

“ये बातें मायने रखती हैं. हम किसी और बड़े शहर में ऐसा करने की कल्पना भी नहीं कर सकते,” वह जोड़ते हैं.

कई ग्लोबल कंपनीज़ के सीईओ मैंगलुरु के नियमित दौरे पर आते हैं.

आईटी उद्योग के नेताओं का कहना है कि उनमें से कई सुबह सर्फिंग करते हैं, क्षेत्र की पहाड़ियों पर ट्रेकिंग करते हैं या दौड़ और साइक्लिंग जैसे फिटनेस समूहों में शामिल होते हैं.

इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए 370 एकड़ के पिलिकुला निसर्गधाम में बने पिलिकुला गोल्फ कोर्स को नया रूप देने का काम भी दिखाया जा रहा है.

Novigo office in Mangaluru | Sharan Povanna/ThePrint
मंगलुरु में नोविगो का ऑफिस | शरण पोवन्ना/दिप्रिंट

यहां की रिच कल्चरल डायवर्सिटी, कोस्टल खाना, और दुनिया भर में मशहूर ‘गड़बड़’ आइसक्रीम, जो यहीं से शुरू हुई, इसके और भी फ़ायदे हैं.

2023-24 में दक्षिण कन्नड़ ने राज्य के जीएसडीपी में 5.4 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि बेलगावी का हिस्सा 3.9 प्रतिशत था. इसके मुकाबले बेंगलुरु अर्बन का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है, जो आईटी राजधानी पर केंद्रित असंतुलित विकास मॉडल को दिखाता है.

“हम वहीं हैं जहां सदी की शुरुआत में बेंगलुरु था,” भट्ट कहते हैं, उनकी आंखों में उम्मीद झलकती है. “यह विकास सरकारी समर्थन के बावजूद नहीं, बल्कि उसके बिना हो रहा है,” भट्ट कहते हैं.

मजाक में कहा जाता है कि सरकार का ध्यान पाने के लिए मैंगलुरु का नाम ‘कोस्टल बेंगलुरु’ रख देना चाहिए.

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, सरकार की ‘बियॉन्ड बेंगलुरु’ जैसी लोकप्रिय योजनाएं, जिनका मकसद कंपनियों को राज्य के दूसरे हिस्सों में स्थापित करना है, उतनी गंभीरता से लागू नहीं की गईं जितनी घोषणा की गई थी.

क्षेत्र का इतिहास

इतिहास में यह क्षेत्र हमेशा अपनी क्षमता से ज्यादा प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता रहा है.

पुराने मद्रास प्रेसिडेंसी के समय प्रशासनिक समर्थन सीमित होने के बावजूद, यह “क्रैडल ऑफ बैंकिंग” यानी बैंकिंग की जन्मस्थली के रूप में मशहूर हुआ. 1880 से 1935 के बीच यहां 22 बैंकों की स्थापना हुई.

इनमें से चार बैंकों का बाद में राष्ट्रीयकरण हुआ. ऐसा दावा न कोई दूसरा राज्य कर सकता है और न ही कोई एक जिला.

यह क्षेत्र शिक्षा की समृद्ध परंपरा के लिए भी जाना जाता है. यहां हर साल करीब 60,000 ग्रेजुएट निकलते हैं, जिनमें इंजीनियर और मेडिकल छात्र शामिल हैं.

सत्या नडेला (माइक्रोसॉफ्ट), राजीव सूरी (पहले नोकिया) और शेफ विकास खन्ना मैंगलुरु और उडुपी के शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े कई सफल लोगों में शामिल हैं.

लेकिन कई सालों तक बड़ी संख्या में ग्रेजुएट्स नौकरी के लिए बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे भारतीय शहरों और विदेशों के बड़े केंद्रों में जाते रहे.

हालांकि आईटी दिग्गज इंफोसिस 1990 के दशक की शुरुआत से यहां मौजूद है, लेकिन टैलेंट को रोक पाना आसान नहीं था.

उस समय मैंगलुरु ऑफिस में काम करना बेंगलुरु जितना आकर्षक नहीं माना जाता था, जहां बेहतर मौके और रंगीन नाइटलाइफ थी.

लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. इंफोसिस के यहां अब करीब 5,000 कर्मचारी हैं. मैंगलुरु में आठ कंपनियां हैं जिनमें 1,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं.

कई उद्योग नेता अब मैंगलुरु लौट रहे हैं.

ईजीडीके इंडिया के सीईओ और निदेशक आनंद फर्नांडीस इस बदलाव का उदाहरण हैं. मध्य पूर्व और बेंगलुरु में सफल करियर के बाद फर्नांडीस 2019 में अपने गृह नगर लौटे, ताकि अपनी पहले की कंपनी फ्रंटएवेन्यू के काम को स्थानीय स्तर पर बढ़ा सकें.

“इरादा यह था कि मैंगलुरु पहले से ही इतने इंजीनियर तैयार कर रहा था. अगर मैं दो लोगों से चार लोगों तक भी बढ़ा पाता, तो यह मेरे लिए बड़ी उपलब्धि होती,” फर्नांडीस ने दिप्रिंट से कहा.

बाद में उनकी कंपनी का अधिग्रहण डेनमार्क की बड़ी कंपनी ईजी ने किया. आज भारत में उनके 850 कर्मचारी हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत मैंगलुरु में हैं और करीब 80 प्रतिशत इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं.

‘बेंगलुरु की गलतियों से बचें’

कई सालों तक मैंगलुरु और उडुपी क्षेत्र अपनी विविध विरासत के लिए जाना जाता रहा है.

7वीं सदी की जीनाथ बख्श जुम्मा मस्जिद, रोसारियो कैथेड्रल और मुरुदेश्वर व गोकर्ण के मंदिर, जैन वास्तुकला की समृद्ध परंपरा के साथ खड़े हैं. यह सब इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता दिखाते हैं, जिसने यहां के लोगों को सदियों तक साथ रहने और आगे बढ़ने का मौका दिया.

लेकिन इसी विविध विरासत का इस्तेमाल अतीत में विभाजन पैदा करने और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए भी किया गया.

आईटी की लहर अब कहानी बदल रही है.

आज मैंगलुरु और उडुपी की सड़कों पर लगभग हर दूसरा होर्डिंग ग्रेजुएट होते छात्रों का है.

ऊंची कांच की इमारतें, को-वर्किंग स्पेस और सजे-धजे आईटी कर्मचारी स्थानीय लोगों की उम्मीदें चुपचाप बढ़ा रहे हैं.

“अगर यह आईटी लहर जारी रही, तो आकांक्षाएं बढ़ेंगी और दूसरी चीजों के लिए जगह नहीं बचेगी कि वे उपलब्धियों को ढक सकें,” 43 साल के नोविगो के सह-संस्थापक मोहम्मद हनीफ कहते हैं.

शेट्टी याद करते हैं कि एक समय ऐसा था जब कोई बैंक निवियस के साथ साझेदारी नहीं करना चाहता था और न ही कंपनी शुरू करते समय नियमों या कानूनी मदद मिलती थी.

Mangaluru's skyline; the dome-like building is the old office of Infosys | Sharan Povanna/ThePrint
मंगलुरु की स्काईलाइन; गुंबद जैसी इमारत इंफोसिस का पुराना ऑफिस है | शरण पोवन्ना/दिप्रिंट

“यहां कोई इकोसिस्टम ही नहीं था,” वह कहते हैं.

आज सफल उद्यमी इस क्षेत्र की सफलता की कहानी दुनिया को बता रहे हैं. वे सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि पैसा भी निवेश कर रहे हैं, कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और क्षेत्र के राजदूत की तरह काम कर रहे हैं.

बढ़ती मांग को देखते हुए लगभग 10 लाख वर्ग फुट के ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस का निर्माण चल रहा है. इन क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंट भी तेजी से बन रहे हैं.

लेकिन साथ ही यह कोशिश भी हो रही है कि बेंगलुरु जैसी गलतियां न दोहराई जाएं.

भट्ट और दूसरे उद्यमी कासरगोड से उडुपी तक 100 किलोमीटर लंबे हाईवे के साथ व्यवस्थित विकास की वकालत कर रहे हैं.

“आईटी प्रोफेशनल अपने गांव या दूसरे स्थानों पर रह सकते हैं और शहर में घुसे बिना ही ऑफिस जा सकते हैं,” वह कहते हैं.

भट्ट खुद उडुपी और मैंगलुरु के बीच आते-जाते रहते हैं, जो लगभग 50 किलोमीटर दूर हैं. “मुझे करीब 45 मिनट लगते हैं,” वह हंसते हुए कहते हैं.

उद्यमियों को उम्मीद है कि सरकार इस सोच को साझा करेगी और बेंगलुरु जैसी जगहों पर हुई गलतियों को दोहराने से बचेगी, जो दुनिया के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले शहरों में से एक है.

“सरकार के समर्थन से हम इस सोच को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं,” वह कहते हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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