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Saturday, 4 April, 2026
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मप्र: इंदौर दूषित पेयजल मुद्दे पर कांग्रेस का स्थगन प्रस्ताव नामंजूर

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भोपाल, 20 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले पर कांग्रेस विधायकों द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया।

अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और इस सत्र में प्रश्नों के माध्यम से इस पर पहले ही चर्चा हो चुकी है।

स्थगन प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रस्तुत किया था, जिस पर अध्यक्ष ने इसकी स्वीकार्यता पर चर्चा कराई।

शहरी प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस घटना में व्यवस्था व प्रशासनिक स्तर पर चूक हुई है और यह इंदौर के लिए एक धब्बा है।

उन्होंने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर के लोग गिरकर भी खड़े होना जानते हैं और यह उनके लिए सबक है व इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार ने इस मामले में सुधारात्मक कदम उठाए हैं इसलिए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं है।

विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ विधायक सीताशरण शर्मा ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई मामला अदालत में विचाराधीन हो तो उस पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सदन में चर्चा नहीं की जा सकती।

वहीं, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इस दलील पर आपत्ति जताई।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मंत्री ने व्यवस्था की चूक स्वीकार की है लेकिन इस प्रस्ताव की स्वीकार्यता पर निर्णय मृतकों के परिजनों के सामने किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर मृतकों के परिजन यह कह दें कि इस मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता नहीं है तो कांग्रेस भी इस प्रस्ताव पर जोर नहीं देगी।

अध्यक्ष तोमर ने कहा, “भगीरथपुरा प्रकरण में अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया है। इसके लिए एक आयोग गठित किया गया है, जिसे दीवानी अदालत के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपना कार्यालय स्थापित कर सुनवाई शुरू कर दी है। सदस्यों ने इस स्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता का मुद्दा मेरे संज्ञान में लाया है।”

उन्होंने कहा, “मैं भावनाओं से ऊपर उठकर यह देखना चाहता हूं कि स्थगन प्रस्ताव में उठाए गए विषयों पर चर्चा की जा सकती है या नहीं। विचार करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि विधानसभा नियमावली के नियम 55 की उपधारा (5) के तहत इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा नहीं की जा सकती, क्योंकि इस सत्र में इस पर पहले ही चर्चा हो चुकी है।”

अध्यक्ष ने बताया कि 19 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्न पर स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने उत्तर दिया था।

उन्होंने कहा कि 20 फरवरी के प्रश्नकाल में बाला बच्चन व महेश परमार, सचिन यादव, प्रताप ग्रेवाल, राजेंद्र मंडलोई और जयवर्धन सिंह के तारांकित प्रश्न तथा महेश परमार के अतारांकित प्रश्न सूचीबद्ध हैं, जिन पर सरकार ने विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किए हैं।

अध्यक्ष तोमर ने कहा, “नियम 55 की उपधारा (7) के तहत भी इस विषय पर चर्चा नहीं की जा सकती। चूंकि यह मामला आयोग द्वारा विचाराधीन है, इसलिए इस पर स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

भाषा सं दिमो जितेंद्र

जितेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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