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Wednesday, 25 March, 2026
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छत्तीसगढ़: आदिवासी की मौत के मामले की जांच के लिए महंत ने मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र

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रायपुर, 19 फरवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को पत्र लिखकर बलरामपुर जिले में एक आदिवासी ग्रामीण की मौत के मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी रामासुब्रमण्यन को 18 फरवरी को लिखे पत्र में महंत ने हंसपुर गांव में हुई घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि इस कार्रवाई में नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने बहुत ज्यादा बल का इस्तेमाल किया, और नतीजतन एक बेगुनाह आदिवासी की मौत हो गई।

महंत ने पत्र में कहा है कि इस घटना ने स्थानीय समुदायों और सिविल सोसाइटी में दुख और परेशानी पैदा की है, जिससे प्रशासन का व्यवहार, जवाबदेही और बुनियादी मानवाधिकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने लिखा, ‘‘मेरा मानना है कि न केवल तथ्यों को स्थापित करने के लिए, बल्कि न्याय और कानून के शासन में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए भी एक पूरी, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।’’

नेता प्रतिपक्ष ने घटना में घायल ग्रामीणों का बेहतर इलाज का भी अनुरोध किया है।

बलरामपुर जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र के हंसपुर गांव में 15 फरवरी को गैर-कानूनी बॉक्साइट खनन के शक में कथित तौर पर कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई। इस घटना में राम उर्फ रामनरेश की मृत्यु हो गई तथा अजीत राम (60) और आकाश अगरिया (20) घायल हो गए।

इस मामले में पुलिस ने हत्या के आरोप में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं कुसमी क्षेत्र के एसडीएम करुण डहरिया तथा तीन अन्य विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना के बाद एसडीएम को निलंबित कर दिया गया है।

भाषा संजीव खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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