लखनऊ: कभी पानी की कमी और प्यास की राजनीति के लिए जाना जाने वाला बुंदेलखंड अब ‘नल से जल’ आपूर्ति के मामले में नई पहचान बना रहा है. जल जीवन मिशन के तहत बुंदेलखंड के सातों जिलों में 98 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) मिल चुका है. कई जिलों में यह आंकड़ा 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है. योगी आदित्यनाथ सरकार इसे ग्रामीण जीवन स्तर में बड़ा बदलाव मान रही है.
आंकड़ों के अनुसार बांदा में 2,68,960 में से 2,68,722 घरों (99.91%), चित्रकूट में 1,63,970 में से 1,63,698 घरों (99.83%), महोबा में 1,40,149 में से 1,39,904 घरों (99.83%), हमीरपुर में 1,86,530 में से 1,85,693 घरों (99.55%) और ललितपुर में 2,06,983 में से 2,05,966 घरों (99.51%) को नल कनेक्शन मिल चुका है.
इसी तरह झांसी में 2,51,232 में से 2,49,111 घरों (99.16%) और जालौन में 2,12,069 में से 2,08,174 घरों (98.16%) तक नल से जल पहुंच गया है. पूरे बुंदेलखंड में कुल 7,59,609 ग्रामीण घरों में से 7,58,017 घरों को कनेक्शन मिल चुका है, जो करीब 99.79 प्रतिशत कवरेज है.
2019 से पहले प्रदेश में ग्रामीण नल जल कवरेज दो प्रतिशत से भी कम था. बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में पाइप से पानी मिलना बहुत दुर्लभ था. जल जीवन मिशन शुरू होने के बाद बड़े स्तर पर ट्यूबवेल, पंप हाउस, ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण किया गया. अब भौतिक ढांचा लगभग पूरा हो चुका है और सरकार का फोकस नियमित जल आपूर्ति और संचालन व्यवस्था को मजबूत करने पर है.
इस योजना से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है. अब उन्हें दूर से पानी लाने की मजबूरी नहीं रही, जिससे समय की बचत हो रही है, स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं.
सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक सभी घरों को नल कनेक्शन देने और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का है.
