नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि स्वभाव से ‘‘वह कभी संतुष्ट नहीं होते’’ हैं क्योंकि उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में कुछ रचनात्मक करने के लिए बेचैनी, ज्यादा करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने और बेहतर सेवा करने की जरूरत होती है।
मोदी ने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि ‘सुधार एक्सप्रेस’ की यात्रा में हासिल की गई प्रगति के स्तर को स्वीकार करना भी महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि लोगों के लिए अधिक हासिल करने और देश को आगे बढ़ाने की हमेशा एक मजबूत इच्छा रहती है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वे भारत की ‘सुधार एक्सप्रेस’ द्वारा कई क्षेत्रों में गति पकड़ने से हुई प्रगति से संतुष्ट हैं, मोदी ने कहा, ‘आपने पूछा है कि क्या मैं सुधार एक्सप्रेस में हुई प्रगति से संतुष्ट हूं। मैं कहना चाहूंगा कि स्वभाव से मैं कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। मेरा मानना है कि सार्वजनिक जीवन में कुछ रचनात्मक करने के लिए बेचैनी, ज्यादा करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने और बेहतर सेवा करने की जरूरत होती है।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने एक लिखित साक्षात्कार में कहा, ‘‘जी हां, हमारी जनता के लिए और अधिक हासिल करने और अपने देश को आगे ले जाने की प्रबल इच्छा हमेशा बनी रहती है। साथ ही, सुधार एक्सप्रेस के सफर के दौरान हासिल की गई प्रगति को भी स्वीकार करना महत्वपूर्ण है।’’
मोदी ने कहा कि सुधार इस सरकार की प्रतिबद्धता है और यह कुछ ऐसा जिसे हमने अक्षरशः प्रदर्शित किया है।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘मुझे यह कहने में गर्व है कि हम क्रमिक सुधारों से निकलकर संरचनात्मक परिवर्तन की दिशा में बढ़े हैं।’’
भाषा अमित रंजन
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