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Saturday, 14 February, 2026
होमदेशमोदी सरकार ने किसानों और कपड़ा उद्योग को नुकसान पहुंचाने वाला व्यापार समझौता किया: राहुल

मोदी सरकार ने किसानों और कपड़ा उद्योग को नुकसान पहुंचाने वाला व्यापार समझौता किया: राहुल

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नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली कोई सरकार अमेरिका के साथ ऐसा व्यापार समझौता करती जो कपास किसानों और कपड़ा निर्यात दोनों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करता, लेकिन मोदी सरकार ने इसके बिल्कुल उलट किया।

उन्होंने यह दावा भी किया कि सरकार ने व्यापार समझौते के इन पहलुओं को छिपाया भी है।

राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर कहा, ’18 प्रतिशत बनाम शून्य प्रतिशत शुल्क। झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इस बारे में भ्रम फैला रही है। किस तरह से वे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास उत्पादकों और वस्त्र निर्यातकों को धोखा दे रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को अमेरिका में वस्त्र निर्यात पर शून्य प्रतिशत शुल्क का फायदा दिया जा रहा है, शर्त बस इतनी है कि वे अमेरिकी कपास आयात करें।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘भारत के गारमेंट्स पर 18 प्रतिशत शुल्क की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया कि अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी।”

उन्होंने सवाल किया कि आखिर ये बात देश से छुपाई क्यों गई?

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है – या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल?’

उन्होंने कहा, ‘अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा कपड़ा उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा। अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।’

राहुल गांधी ने इस बात का उल्लेख किया कि भारत में कपड़ा उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी इन्हीं पर टिकी है।

उन्होंने कहा, ‘इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जिससे कपास किसानों और कपड़ा निर्यात – दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित होती।’

उन्होंने दावा किया, ‘ इसके ठीक उलट, नरेन्द्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।’

भाषा हक जोहेब

जोहेब

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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