scorecardresearch
Friday, 27 March, 2026
होमदेशघाटी के लोगों के जम्मू में जमीन पर कब्जा करने के भाजपा विधायक के दावे पर विधानसभा में हंगामा

घाटी के लोगों के जम्मू में जमीन पर कब्जा करने के भाजपा विधायक के दावे पर विधानसभा में हंगामा

Text Size:

(तस्वीरों के साथ)

जम्मू, 13 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक विक्रम रंधावा के इस दावे को लेकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को जबरदस्त हंगामा हुआ कि कश्मीर घाटी के लोग जम्मू शहर में जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।

सदन में प्रश्नकाल के दौरान रंधावा के एक सवाल का मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की तरफ से जवाब देते हुए सामाजिक कल्याण मंत्री सकीना ईटू ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, बहू तहसील में 688 कनाल (8 कनाल जमीन एक एकड़ के बराबर) और 17 मरला (160 मरला जमीन एक एकड़ के बराबर) तथा जम्मू दक्षिण तहसील में 579 कनाल भूमि पर अवैध कब्जा है।

ईटू ने कहा, “ये अतिक्रमण काफी पुराने हैं और सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जाधारियों को बेदखल करना) अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के प्रावधानों के अनुसार इन्हें हटाया जा रहा है।”

उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक बहू और जम्मू दक्षिण तहसील में कुल 34 अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए गए हैं, जिनमें जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) से जुड़ी 140 कनाल और 11 मरला भूमि वापस हासिल की गई है।

रंधावा ने आरोप लगाया कि घाटी के लोगों की बस्तियां जेडीए और सरकार की अतिक्रमित भूमि पर बनी हैं तथा अधिकारी अतिक्रमण हटाने में विफल रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इन बस्तियों में से 90 फीसदी कश्मीर घाटी से आए लोगों की हैं।

भाजपा विधायक ने कहा, “सरकार इसकी जांच करे और मेरे निर्वाचन क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करे। जम्मू में जेडीए की 16,000 कनाल से अधिक भूमि पर अतिक्रमण है।”

उन्होंने कहा, “हमें कश्मीर घाटी के लोगों के जमीन खरीदकर अपने मकान बनाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें सरकारी भूमि पर आवास का निर्माण नहीं करना चाहिए।”

सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के विधायकों ने रंधावा की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई।

ईटू ने भाजपा विधायक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अतिक्रमण के मुद्दे को क्षेत्र के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए और जम्मू-कश्मीर को ऐसे आधारों पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।

इसके बाद रंधावा हाथ में कुछ दस्तावेज लेकर सदन में आसन के करीब पहुंच गए और अतिक्रमण को तुरंत हटाने की मांग की।

बाद में सदन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में रंधावा ने आरोप लगाया कि सरकार अतिक्रमणकारियों की सूची छिपा रही है, क्योंकि वे घाटी के रहने वाले हैं।

उन्होंने सवाल किया, “सरकार मुझे सूची उपलब्ध कराने में विफल क्यों रही?”

भाषा पारुल नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments