नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को कहा कि समान नागरिक संहिता भारत की मूलभूत संवैधानिक भावना और समावेशी सोच को मजबूत करेगी।
नकवी ने कहा कि जो लोग इस संवैधानिक सुधार को ‘‘सांप्रदायिक रूप से निशाना बनाने’’ में शामिल हैं, वे न तो देश के और न ही किसी धर्म के शुभचिंतक हैं। उन्होंने दावा किया कि इस संवैधानिक सुधार का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करना है।
उन्होंने यहां गार्गी कॉलेज में कहा, ‘‘संविधान की शक्ति को दुर्भावनापूर्ण साजिशों से बचाना भी हमारा संवैधानिक कर्तव्य है।’’
नकवी लोकसभा सचिवालय के संवैधानिक और संसदीय अध्ययन संस्थान (आईसीपीएस) द्वारा आयोजित संवैधानिक मूल्यों और मौलिक कर्तव्यों पर एक युवा सशक्तीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
अल्पसंख्यक मामलों के पूर्व मंत्री ने कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता बहुसंख्यक समुदाय की समावेशिता, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है।
उन्होंने कहा, ‘‘विभाजन की भयावहता के बाद जहां भारत के हिंदू बहुसंख्यक समुदाय ने धर्मनिरपेक्षता का मार्ग चुना, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के मुस्लिम बहुसंख्यक समुदाय ने इस्लामी राष्ट्र का झंडा फहराया। भारतीय संविधान की विविधता में एकता की समावेशी और व्यापक सोच बहुसंख्यक समुदाय के मूल्यों, संकल्प और संस्कृति का परिणाम है।’’
नकवी ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों की शक्ति ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत में सत्ता का निर्धारण ‘‘बैलट’’ (मतदान) के माध्यम से होता है, न कि ‘‘बुलेट’’(गोली) के माध्यम से।
उन्होंने कहा कि भारत संविधान और लोकतंत्र के ‘‘सामंती दमन’’ का मुकाबला करके संवैधानिक लोकतंत्र का ‘‘वैश्विक नायक’’ बन गया है।
नकवी ने कहा कि मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों ने भारत को मौजूदा ‘‘अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल और घरेलू व्यवधानों’’ के बीच एक वैश्विक ब्रांड में बदल दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘संवैधानिक प्रदर्शन की राजनीति ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति की जगह ले ली है। समावेशी सशक्तीकरण हमारे देश की प्राथमिकता है, न कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण।’’
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी
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