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Tuesday, 10 February, 2026
होमदेशउमर ने भाजपा से माफी मांगने से इनकार किया, विधानसभा में की गयी टिप्पणियों का बचाव किया

उमर ने भाजपा से माफी मांगने से इनकार किया, विधानसभा में की गयी टिप्पणियों का बचाव किया

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जम्मू, 10 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को विधानसभा में अपनी कुछ टिप्पणियों के लिए भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों से माफी मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने शब्द वापस लेने को तैयार थे, लेकिन बार-बार व्यवधान पैदा कर सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अब माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि ये बातें पहले से ही रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी हैं।’’

इससे पहले, दिन में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भाषण के दौरान हंगामा देखने को मिला। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने मुख्यमंत्री की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और उनसे माफी मांगने की मांग की। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने दिनभर के लिए विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी।

अब्दुल्ला छह फरवरी को पेश किए गए केंद्र शासित प्रदेश के बजट पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। भारतीय जनता पार्टी के सदस्य उनके लगभग 40 मिनट के भाषण के ज्यादातर समय खड़े रहे।

विधानसभा अध्यक्ष राथर ने बाद में भाजपा विधायकों को बताया कि उनके विरोध को रिकॉर्ड पर नहीं लिया जायेगा। इससे पहले अध्यक्ष ने विपक्षी दल के सदस्यों को अपनी सीट पर बैठने के लिए बार-बार मनाने की कोशिश की।

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह जम्मू-कश्मीर के हितों के लिए नुकसानदायक है।

मुख्यमंत्री ने भाषण के दौरान व्यवधान पैदा करने वाले भाजपा के विधायकों के खिलाफ भी कुछ टिप्पणियां की।

इसके बाद भाजपा विधायक खड़े हो गए और अब्दुल्ला की टिप्पणियों को ‘असंसदीय’ बताते हुए सबसे आगे की कतार में खड़े हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से माफी की मांग करते हुए उनके खिलाफ नारे लगाए।

विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘अगर उन्होंने (भाजपा सदस्यों ने) मुझे बोलने दिया होता, तो मैं स्वयं ही अपने शब्द वापस ले लेता। मैं उन्हें वापस लेने और वही बात दूसरे तरीके से कहने को तैयार था, लेकिन उन्होंने मुझे बोलने ही नहीं दिया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मांफी मांगने का अब कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। जो कहा गया है वह पहले से ही रिकॉर्ड पर है। उन्होंने मुझे क्या एक सेकंड भी बोलने दिया? मैं वहां यह कहने के लिए खड़ा था कि ठीक है, मैं अपने शब्द वापस ले लूंगा और वही बात दूसरे तरीके से कहूंगा, लेकिन चूंकि उन्होंने मुझे बोलने नहीं दिया, इसलिए माफी मांगने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग विधानसभा में देश और संविधान के बारे में ‘ज्ञान बांट’ रहे हैं, वे लोग 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में कार्यक्रम समाप्त होने तक बैठ भी नहीं पाये थे।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘विपक्ष के नेता (सुनील शर्मा), जो हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हैं, मैं उनके ठीक बगल में बैठा था। वह पूरे समय (तक) बैठे नहीं रह सके। आधे रास्ते में, आप (शर्मा) उठकर चले गए। और फिर आप यहां हमें राष्ट्रवाद पर ज्ञान देने आए हैं।’’

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जम्मू-कश्मीर के हितों के लिए नुकसानदायक होने के उनके बयान के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘अगर आप अभी देखें– शाहबलूत, सूखे मेवे, ताजे फल, डेयरी उत्पाद– अगर इनका शुल्क मुक्त आयात किया जाता है, तो हमारे पास क्या बचता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास कोई समुद्री उद्योग नहीं है, कोई समुद्री भोजन नहीं है। हमारे पास जो है, वह है बागवानी– सूखे मेवे, अखरोट, बादाम, केसर, सेब, कीवी… बस यही है हमारे पास। अब, अगर ये सभी चीजें अमेरिका से शुल्क मुक्त आने लगीं, तो जम्मू-कश्मीर को नुकसान होना तय है।’’

अब्दुल्ला ने यह भी दावा किया कि भाजपा के सदस्य इसलिए नाराज थे, क्योंकि उन्होंने लोगों के सामने कुछ सच्चाई रखी थी।

केंद्र शासित प्रदेश सरकार का वित्त विभाग संभालने वाले अब्दुल्ला ने विधानसभा में अपने दूसरे बजट का भी बचाव किया। उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया कि बजट केंद्रीय योजना तक ही सीमित है।

उन्होंने कहा कि इसमें सबसे गरीब तबके के लिए राहत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वृद्धि को प्राथमिकता दी गई है।

इस बीच, विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने अब्दुल्ला की आलोचना की और कहा कि उनकी पार्टी के सदस्य सदन को तब तक नहीं चलने देंगे, जब तक मुख्यमंत्री अपने शब्द वापस नहीं ले लेते और विधानसभा में बिना शर्त माफी नहीं मांग लेते।

सदन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में शर्मा ने कहा कि यह दिन जम्मू कश्मीर विधानसभा के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा, और इस कार्यवाही को देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर एक धब्बा करार दिया।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री सदन के नेता हैं, लेकिन उन्होंने संसदीय मर्यादा की सभी हदें पार कर दीं, विधानसभा की पवित्रता को तार-तार कर दिया। ऐसी भाषा उनके कद के लायक नहीं है और इस देश की किसी भी विधानसभा में किसी भी मुख्यमंत्री ने इसका इस्तेमाल नहीं किया है।’’

भाषा रंजन रंजन सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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