लखनऊ, नौ फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के आदेश पर राज्य बोर्ड ने एक छात्र को नौ महीने के संघर्ष के बाद उसकी हाईस्कूल की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान के अनुसार कोई नौ महीने की जद्दोजहद के बाद 15 साल के 11वीं कक्षा के छात्र शशि शेखर दुबे को आखिरकार उप्र बोर्ड ने 2025 की हाईस्कूल परीक्षा (10वीं कक्षा) की सभी छह विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं की फोटो कॉपी उपलब्ध करा दी।
छात्र को उसकी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं तब मिली, जब राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने दंडित करने की चेतावनी दी।
पीठ ने जन सूचना अधिकारी को दंडित करने का भी अनोखा तरीका निकाला। सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में लिखा है ‘ इस प्रकरण में हम आरटीआई (जनसूचना अधिकार) एक्ट के तहत जन सूचना अधिकारी पर अर्थदंड लगा सकते थे, लेकिन आयोग का मत है कि वह दंड राशि जमा कर अपराध बोध से मुक्त हो जाएगा। दंड से अधिक प्रभावी उपाय उसके आचरण की भर्त्सना है, जो उसे हमेशा कचोटती रहेगी और भविष्य में किसी अन्य छात्र के साथ ऐसे गैर-जिम्मेदाराना आचरण की पुनरावृत्ति को भी रोकेगी।’
झांसी जिले के शशि शेखर दुबे ने 2025 में यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसको गणित में 100/100 अंक प्राप्त हुए, जबकि हिंदी में 92, विज्ञान में 90, सामाजिक विज्ञान में 87, चित्रकला 84 एवं अंग्रेजी में 73 अंक मिले। उसको यह लगा कि गणित को छोड़कर अन्य विषयों में भी उसको और अधिक अंक मिलने चाहिए थे। इन विषयों में उसने जो जवाब लिखा था, उसके अनुरूप उसको अंक क्यों नहीं मिले, इसे जानने को उसकी जिद्दोजहद शुरू हुई और उसने सूचना का अधिकार अधिनियम का सहारा लिया।
शशि शेखर दुबे ने सर्वप्रथम 24 मई 2025 को माध्यमिक शिक्षा परिषद के जन सूचना अधिकारी के समक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान एवं चित्रकला विषयों की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की प्रमाणित छाया प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध न कराये जाने के कारण शशि शेखर ने 24 जून 2025 को प्रथम अपील प्रस्तुत की, किंतु प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा भी यह कहकर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई कि अभी ‘स्क्रूटनी’ की प्रक्रिया चल रही है।
इसके बाद शशि शेखर ने राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत की, जिस पर सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
जनसूचना अधिकारी ने 18 सितंबर 2025 एवं 13 नवंबर 2025 को आयोग से कहा कि अपीलकर्ता को 26जुलाई 25 को पत्र भेजकर 22 अगस्त 2025 को बोर्ड कार्यालय में उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन हेतु बुलाया गया था लेकिन वह उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन के लिए इस तारीख पर उपस्थित नहीं हुआ।
हालांकि शशि शेखर दुबे ने आयोग से कहा कि यूपी बोर्ड इस मामले को गलत दिशा में ले जा रहा है, बोर्ड को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं न उपलब्ध करानी पड़ें इसलिए उसे उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन के लिए बुलाया जा रहा है और यह गलत जानकारी दी जा रही है कि उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने का कोई नियम नहीं है, केवल अवलोकन कराया जा सकता है।
आयोग के समक्ष चार दिसंबर 2025 की सुनवाई में यूपी बोर्ड की ओर से उपस्थित अधिकारी प्रधान सहायक मनोज कुमार ने कहा कि मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान पहले था, किंतु अब नहीं है।
इस पर सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने जनसूचना अधिकारी को निर्देश दिया कि यदि ऐसा कोई नवीन नियम अस्तित्व में है तो उसकी प्रति अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए, अन्यथा दंडात्मक कार्यवाही पर विचार किया जाएगा।
आयोग के समक्ष दो फरवरी 2026 की सुनवाई में जन सूचना अधिकारी ने कहा कि अपीलकर्ता को सभी छह विषयों की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की प्रमाणित प्रति उपलब्ध करा दी गई हैं। उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराने में हुई देरी के लिए खेद व्यक्त किया गया।
छात्र द्वारा भी इस तथ्य की पुष्टि की गई कि उसको कॉपियां मिल गई हैं, लेकिन उसके द्वारा आयोग को बताया गया कि उसने कई विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं में पाया है कि उत्तर सही होते हुए भी कॉपी जांचने वाले शिक्षक ने कम नम्बर दिए हैं, जिसके वजह से गणित को छोड़कर अन्य विषयों में उसके कम अंक आए और उसकी मेरिट नीचे हो गई। उसने कहा कि वह अब पुनर्मूल्यांकन चाहता है।
पीठ ने अपने आदेश में लिखा है कि उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन अथवा अंक बढ़ाने का निर्देश देना सूचना आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
भाषा आनन्द
राजकुमार
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