नई दिल्ली: लोकसभा में हंगामे और कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि जिस लोकतंत्र में नेता विपक्ष को अपनी बात रखने की अनुमति न हो, वह लोकतंत्र नहीं हो सकता.
मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी को एक मिनट के लिए भी बोलने नहीं दिया गया, जो बेहद हास्यास्पद है.
उन्होंने कहा, “यह बहुत दुखद है कि हम सदन में जाते हैं और बिना किसी काम के बाहर आ जाते हैं. नेता विपक्ष को एक मिनट के लिए भी बोलने नहीं दिया जा रहा. यह लोकतंत्र नहीं है. हम यहां आखिर क्यों आ रहे हैं? उन्हें राहुल को बोलने देना चाहिए.”
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्ष के विरोध के बाद कई बार स्थगन के बाद लोकसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई. नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें भरोसा दिया था कि बजट पर चर्चा से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा.
लोकसभा में राहुल गांधी ने कहा, “एक घंटे पहले सदन के एक सदस्य ने स्पीकर से बात की थी. स्पीकर ने कहा था कि मुझे बोलने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन अब आप अपने शब्दों से पीछे हट रहे हैं. मैं जानना चाहता हूं कि मुझे अपनी बात रखने दी जाएगी या नहीं?”
इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित करने का आरोप लगाया.
प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था. स्पीकर ने कहा था कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक जाकर कोई अभूतपूर्व कदम उठा सकते हैं.
प्रियंका गांधी ने कांग्रेस सांसदों का बचाव करते हुए कहा कि महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हाथ नहीं उठा सकतीं.
उन्होंने कहा, “मैं पहले ही कह चुकी हूं कि स्पीकर का अपमान किया गया है और उन पर इतना दबाव है कि उन्हें खुद बयान देना पड़ा. महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हाथ नहीं उठा सकतीं. हम 11 कांग्रेस सांसद हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं और सभी बहुत गंभीर हैं. यह बयान गलत है और सरकार के दबाव में दिया गया है. प्रधानमंत्री में सदन में आने का साहस नहीं था, इसलिए स्पीकर को उनकी ओर से ऐसा बयान देना पड़ा, जो गलत है.”
इससे पहले सोमवार को कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने उनके खिलाफ “झूठे, निराधार और मानहानिकारक” आरोप लगाने के लिए स्पीकर पर दबाव बनाया.
पत्र में सांसदों ने कहा कि सदन में उनका विरोध शांतिपूर्ण था और संसदीय मर्यादाओं के अनुसार था, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लगातार चार दिनों तक नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों पर “अश्लील और आपत्तिजनक” टिप्पणियां करने की अनुमति दी गई.
कांग्रेस सांसदों ने यह भी दावा किया कि जब वे उस भाजपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर स्पीकर से मिले, तो उन्होंने इसे “गंभीर गलती” माना, लेकिन बाद में कहा कि वे सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब वे स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रहे हैं.
