scorecardresearch
Monday, 9 February, 2026
होमदेशउत्तराखंड: अंकिता हत्या मामले पर हुई महापंचायत, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग

उत्तराखंड: अंकिता हत्या मामले पर हुई महापंचायत, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग

Text Size:

देहरादून, आठ फरवरी (भाषा) उत्तराखंड के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने रविवार को यहां महापंचायत आयोजित करके चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल कथित ‘वीआईपी’ के खुलासे के लिए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच कराए जाने की मांग की।

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले यहां परेड ग्राउंड के बाहर हुई महापंचायत में अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह और मां सोनी देवी की मौजूदगी में चेतावनी दी गयी कि अगर आगामी 15 दिन में उनकी मांग के आधार पर सीबीआई जांच में प्रगति नहीं हुई तो इस आंदोलन को तेज किया जाएगा।

महापंचायत में सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों में अंकिता के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपे गए पत्र को ही सीबीआई जांच के लिए शिकायती पत्र माने जाने, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच करवाए जाने और इस संबंध में पर्यावरणविद अनिल प्रकाश जोशी द्वारा दर्ज कराई गयी प्राथमिकी को रद्द किए जाने की मांग की गई है।

इसके अलावा हत्याकांड के बाद वनंत्रा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने की अनुमति देने वाले धामी को जांच होने तक मुख्यमंत्री पद से स्वयं हट जाने तथा भाजपा पदाधिकारियों दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार को जांच के दायरे में लाए जाने की भी मांग की गई।

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग रखी थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

सिंह ने हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ के खुलासे के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने वाले जोशी के बारे में कहा कि वह उन्हें जानते तक नहीं हैं और प्राथमिकी दर्ज कराने से पहले तथा बाद में भी उन्होंने उनसे कोई संपर्क नहीं किया।

महापंचायत को समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि न्याय की इस लड़ाई में उन्हें सामाजिक संगठनों के साथ या उनके पीछे चलने में कोई संकोच नहीं है क्योंकि जनभावना राजनीति से बड़ी होती है।

उन्होंने कहा, “इस समय उत्तराखंड की जनभावना यह है कि हमारी बेटी के ऐसा करने वाले व्यक्ति को दंडित किया जाए, चाहे कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो और दुनिया की कितनी भी बड़ी ताकतें उसे बचाने में लगी हों।”

रावत ने कहा कि अंकिता ने उत्तराखंड के आत्मगौरव के लिए अपनी जान दे दी लेकिन अब प्रदेश की जनता को उसे न्याय दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखनी होगी।

उत्तराखंड महिला मंच की प्रमुख कमला पंत ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ का खुलासा होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माले के इंद्रेश मैखुरी ने मांग की कि ‘वीआईपी’ का जल्द से जल्द पर्दाफाश किया जाए ताकि अंकिता को न्याय मिल सके।

महापंचायत में 40 संगठनों ने हिस्सा लिया जिसमें सामाजिक संगठनों के अलावा ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक भी शामिल रहे।

महापंचायत में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग ‘अंकिता को न्याय दिलाओ’, ‘वीआईपी कौन’ और ‘अंकिता के हत्यारों को बचाना बंद करो’ जैसी तख्तियां और पोस्टर लिए हुए थे।

वर्ष 2022 में पौड़ी जिले के वनंत्रा रिजॉर्ट में बतौर ‘रिसेप्शनिस्ट’ काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। तीनों को सत्र न्यायालय उम्रकैद की सजा सुना चुका है।

हालांकि, हाल में खुद को पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताने वालीं अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर अपने वीडियो तथा राठौर के साथ कथित बातचीत के ऑडियो जारी किए थे, जिसके बाद मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया था। इन वीडियो में सनावर ने आरोप लगाया था कि अंकिता हत्याकांड में भाजपा के कथित ‘वीआईपी’ नेता ‘गटटू’ शामिल हैं।

इन खुलासों के बाद प्रदेश में एक बड़ा आंदोलन छिड़ गया जिसके बाद नौ जनवरी को मुख्यमंत्री ने प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी।

भाषा दीप्ति

जोहेब

जोहेब

जोहेब

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments