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Sunday, 8 February, 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अर्थव्यवस्था, संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा: माकपा

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नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को दावा किया कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते में भारत ने अमेरिका को ‘व्यापक रियायतें’ दी हैं जो “हमारी अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा” पैदा करती हैं।

एक बयान में वामपंथी पार्टी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार को इस समझौते को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए और इसे संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

भारत और अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की कि वे एक अंतरिम व्यापार समझौते के प्रारूप पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे।

माकपा ने अपने पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान में कहा, ‘‘जैसे-जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विवरण धीरे-धीरे सामने आ रहा है, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तथाकथित ‘अंतरिम समझौते’ में अमेरिका को व्यापक रियायतें दी हैं। ये रियायतें भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंशिक जानकारी के अनुसार भारत सरकार ने अमेरिका से फलों, कपास, मेवा, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य खाद्य एवं कृषि उत्पादों के निर्यात पर कोई शुल्क न लगाने (शून्य शुल्क) पर सहमति जताई है।’’ पार्टी ने कहा कि इस निर्णय से देश भर में लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोयाबीन किसानों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी।

माकपा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा अन्य राज्यों के सेब किसान पहले से ही न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों के कारण परेशान हैं और अमेरिका के साथ हुआ यह समझौता उनकी आजीविका को और भी बर्बाद कर देगा।

पार्टी ने कहा कि कपास किसानों को भी इसी तरह की तबाही का सामना करना पड़ेगा जो पहले से ही बढ़ती लागत और गंभीर कृषि संकट से जूझ रहे हैं।

बयान में कहा गया है कि रिपोर्टों से यह भी संकेत मिलता है कि भारत सरकार ने खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने पर सहमति जताई है।

बयान के मुताबिक, इसका सीधा मतलब होगा भारतीय किसानों के लिए समर्थन और सब्सिडी को वापस लेना जिससे वे भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों से प्रतिस्पर्धा के लिए असुरक्षित हो जाएंगे और भारतीय कृषि का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

वामपंथी पार्टी ने कहा कि यह व्यापार समझौता ‘‘हमारी संप्रभुता पर प्रहार है, क्योंकि अमेरिका हमारी नीतियों को निर्देशित कर रहा है, जिसमें रूस से तेल खरीदने से जुड़ा फैसला भी शामिल है।’’

बयान में कहा, “यह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का शर्मनाक आत्मसमर्पण है।”

वामपंथी पार्टी ने कहा, “यह बेहद निंदनीय है कि सरकार ने अमेरिकी रक्षा आपूर्ति पर अपनी निर्भरता बढ़ाने का संकल्प लिया है, जो भारत के रणनीतिक हितों के लिए हानिकारक होगा।’’ माकपा ने अपनी मांग दोहराई कि समझौते का पूरा विवरण तुरंत संसद के समक्ष रखा जाए और सार्वजनिक किया जाए।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि आयात में किसी भी महत्वपूर्ण वृद्धि से किसानों और घरेलू उद्योग के हितों की रक्षा के लिए अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।

गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता ‘अंततः हमारे किसानों की मदद करेगा’ जो पहले से ही 50-55 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के कृषि और मत्स्य उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं।

भाषा संतोष प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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