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Friday, 6 February, 2026
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विधानसभा की व्यवस्था वाली केंद्र शासित प्रणाली खत्म करके राष्ट्र को उपहार दें प्रधानमंत्री: उमर

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जम्मू, पांच फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विधानसभा की व्यवस्था वाली केंद्र शासित प्रदेश प्रणाली खत्म करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर में “शासन संबंधी भ्रम” को खत्म करने के लिए काफी समय से लंबित सरकारी कामकाज के नियमों को आने वाले दिनों में मंजूरी दी जाएगी।

विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में अब्दुल्ला ने कहा कि संविधान से विधानसभा वाली केंद्रशासित प्रणाली को खत्म करने से देश को फायदा होगा।

उन्होंने कहा, “सच है कि एक केंद्रशासित प्रदेश में काम करना बेहद कठिन है। मैं जानना चाहता हूं कि इस विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश मॉडल के पीछे कौन था। मैं यह साफ-साफ कहता हूं— यदि हमारे प्रधानमंत्री इस देश को कोई उपहार देना चाहते हैं, तो उन्हें इस प्रणाली को खत्म कर देना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने एक घंटे से अधिक समय के अपने संबोधन में कहा, “यदि आप केंद्रशासित प्रदेश रखना चाहते हैं, तो उसमें विधानसभा न रखें; और यदि किसी क्षेत्र के लिए विधानसभा जरूरी है, तो उसे राज्य बना दें।”

हाल ही में एक विधायक ने कहा था कि मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते।

विधायक के इस बयान का उल्लेख करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “हालांकि इस बयान में कोई सच्चाई नहीं है, लेकिन इस विधान सभा की व्यवस्था वाले केंद्र शासित प्रदेश मॉडल के तहत सरकार चलाना बेहद कठिन है। यह जनादेश के साथ एक बड़ा धोखा है।”

अब्दुल्ला ने पहले कई बार वित्त मंत्री रह चुके विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर से पूछा, “इन परिस्थितियों में काम करना कितना कठिन है… जब बजट तैयार किया जा रहा हो, तो क्या आप अपने वित्त सचिव को बजट पेश करने से 10 दिन पहले बदल देंगे?”

उन्होंने कहा, “हम बजट तैयार कर रहे थे, इस दौरान मैंने सोशल मीडिया पर पढ़ा कि जम्मू-कश्मीर के वित्त सचिव को तत्काल प्रभाव से दिल्ली भेज दिया गया है क्योंकि अब हम केंद्रशासित प्रदेश कैडर का हिस्सा हैं और तबादले हमारे नियंत्रण में नहीं हैं। यह स्थिति है। बताइए, क्या देश में कहीं और ऐसा होता है कि बजट तैयार होते समय वित्त सचिव का अचानक तबादला कर दिया जाए।”

उन्होंने कहा कि सौभाग्यवश मुख्य सचिव से बात करने के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि वित्त सचिव नौ फरवरी तक बने रहेंगे।

उन्होंने कहा, “अन्यथा वह चले जाते, और मुझे नहीं पता कि किस परिस्थितियों में बजट तैयार होता। यह स्थिति है।”

हालांकि, अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित कामकाज संबंधी नियमों को आने वाले दिनों में मंजूरी मिल जाएगी।

उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में हमारे कामकाज के नियम तय हो जाएंगे। जब तक हमें पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता, कामकाज के नियमों के इस भ्रम के कारण हमारे कई मुद्दे बरकरार रहेंगे।”

भाषा जोहेब संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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