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Thursday, 5 February, 2026
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वेणुगोपाल ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित करने में ‘प्रक्रियात्मक अनियमितता’ का आरोप लगाया

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नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने बृहस्पतिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के समापन के दौरान हुई कथित ‘प्रक्रियात्मक अनियमितताओं’ को लेकर आपत्ति जताई।

वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब नहीं देने के संदर्भ में अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में सदन को अवगत कराने का आग्रह किया।

लोकसभा ने बृहस्पतिवार को विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूरी दी, हालांकि यह प्रधानमंत्री के जवाब के बिना हुआ। परंपरा रही है कि प्रधानमंत्री के चर्चा का जवाब देने के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया जाता है।

वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, ‘‘यदि किसी कारणवश प्रधानमंत्री ऐसा करने (चर्चा का जवाब देने) में असमर्थ या अनिच्छुक हों, तो सदन को इसकी जानकारी देना उनकी जिम्मेदारी है। वर्तमान मामले में न तो प्रधानमंत्री ने चर्चा का जवाब दिया और न ही सदन को इसकी जानकारी दी गई। यह स्पष्ट रूप से नियम 20 का उल्लंघन है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह स्थापित परंपरा है कि किसी चर्चा का समापन संबंधित मंत्री के उत्तर से होता है।

वेणुगोपाल ने कहा, “असाधारण परिस्थितियों में, यदि सदन मंत्री के उत्तर के बिना ही चर्चा समाप्त करना चाहे, तो नियम 362 के तहत किसी सदस्य द्वारा प्रस्ताव लाया जाना आवश्यक है। केवल तभी, जब अध्यक्ष उस प्रस्ताव को सदन के समक्ष रखें और सदन उसे स्वीकृत करे, फिर चर्चा को समाप्त मानकर मुख्य प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि इस मामले में नियम 362 के तहत कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इसके बावजूद दिन में लगभग 12 बजे अचानक धन्यवाद प्रस्ताव को सदन के समक्ष रख दिया गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना बहस समाप्त कर दी गई। यह नियम 362 का उल्लंघन है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मैं पांच फरवरी को सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के समापन के दौरान हुई गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितताओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।”

वेणुगोपाल ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह नियम 20 के तहत प्रधानमंत्री के उत्तर और नियम 362 के तहत चर्चा समाप्त करने की प्रक्रिया की प्रामाणिकता के बारे में सदन को जानकारी दें।

उन्होंने कहा, “आप सदन के नियमों के संरक्षक हैं और हम सभी का कर्तव्य है कि हम इन नियमों का पालन करें। यह सदन केवल उन नियमों के आधार पर चल सकता है जो संविधान के अनुच्छेद 118 के तहत बनाए गए हैं।

भाषा हक संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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