इंफाल, पांच फरवरी (भाषा) मणिपुर सरकार में तीन कुकी-जो विधायकों के शामिल होने के बाद एक संगठन ने बृहस्पतिवार को उन पर समुदाय के साथ विश्वासघात करने और मेइती समुदाय के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाते हुए उनके सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की।
कई समूहों ने कुकी बहुल चूड़ाचांदपुर जिले में शुक्रवार को ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान भी किया।
मणिपुर में मई 2023 में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसके चलते पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।
कुकी-जो समुदाय के नेताओं द्वारा समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की मांग के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यह पदभार भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लगभग एक वर्ष बाद संभाला।
कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट की विधायक एल. दिखो ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।
विधानसभा में कुकी-जो समुदाय के कुल 10 विधायक हैं, जिनमें से सात भाजपा से हैं।
हमार जनजाति के विधायक एन. सनाते, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया। इस दल में कुकी-जो जनजाति के एक अन्य विधायक, एल. एम. खौते भी शामिल थे।
हमार लोग कुकी-जो समुदाय का हिस्सा हैं।
कुकी जो परिषद (केजेडसी) ने बृहस्पतिवार को एक बयान में मणिपुर सरकार के गठन में कुछ कुकी-जो विधायकों की भागीदारी की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए कहा कि यह 13 जनवरी 2026 के लुंगथू प्रस्ताव का घोर उल्लंघन है।
प्रस्ताव के अनुसार, कुकी-जो समुदाय के सदस्य सरकार गठन में तभी भाग लेंगे जब केंद्र और राज्य के अधिकारियों से लिखित आश्वासन प्राप्त होगा कि एक विधायिका के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में एक अलग प्रशासन होगा।
इसमें कहा गया है कि सरकार में शामिल होकर, इन कुकी विधायकों ने प्रभावी रूप से खुद को मेइती लोगों के साथ जोड़ लिया है और उन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है।
संगठन ने बयान में कहा, ‘‘केजेडसी मणिपुर सरकार के गठन में भाग लेने वाले सभी कुकी-जो विधायकों की निंदा करता है और कुकी-जो के सभी क्षेत्रों में उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करता है।’’
संगठन ने कुकी-जो लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी सामाजिक, पारंपरिक या सार्वजनिक मामले में उनके साथ सहयोग या संबंध न रखें।
संगठन ने कहा कि यह बहिष्कार तब तक लागू रहेगा जब तक वे कुकी-जो लोगों के सामूहिक रुख के अनुरूप स्वयं को स्थापित नहीं कर लेते।
कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है।
बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया।
कुकी लिबरेशन आर्मी (लेटखोलुन) ने एक बयान में कहा कि वह एक “स्पष्ट और अंतिम चेतावनी” जारी कर रही है। संगठन ने कहा कि कोई भी कुकी-जो प्रतिनिधि, जो सरकार के गठन में भाग लेने का फैसला करता है, उसे समुदाय के लोगों के साथ विश्वासघात करने वाला माना जाएगा।
बयान में कहा, ‘‘ऐसे किसी भी कदम के चलते अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन कुकी-जो विधायकों पर ही होगी।’’
मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसकी शुरुआत पहाड़ी जिलों में निकाली गई एक आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी। यह रैली बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई थी।
हिंसा में अब तक कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों तथा सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
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