नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने ‘फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी’ के गठन के लिए बृहस्पतिवार को नगालैंड सरकार और ‘इस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन’ (ईएनपीओ) के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गए।
शाह ने कहा कि केंद्र सरकार पूर्वी नगालैंड के विकास के लिए हर संभव सहयोग करेगी और अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाएगी
शाह ने कहा, ‘‘एक-दो बिंदुओं को छोड़कर, बाकी सभी मुद्दे सुलझ गए हैं।’’ राज्य के छह पूर्वी जिलों में फैली आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च संस्था ईएनपीओ, दशकों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए वर्ष 2010 से ही एक अलग राज्य की मांग कर रही है।
बाद में इसने केंद्र के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जिसमें ‘फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी’ (एफएनटीए) ढांचे के तहत कुछ हद तक स्वायत्तता देने की बात कही गई थी।
इस समझौते का उद्देश्य पूर्वी नगालैंड के केंद्रित विकास और शासन के लिए ‘फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी’ का गठन करना है, जिसमें छह जिले किपहिरे, लोंगलेन्ग, मोन, नोकलक, शमाटोर और तुएनसांग शामिल हैं।
शाह ने कहा कि उन्होंने चुनाव के दौरान रियो से बात की थी और रियो ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे ईएनपीओ की सभी मांगों को सुनेंगे, उन पर चर्चा करेंगे और उन्हें स्वीकार करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए मैं रियो, नगालैंड सरकार, मंत्रियों और सभी सांसदों का धन्यवाद करता हूं।’’ शाह ने कहा कि एक-दो मुद्दों को छोड़कर बाकी सभी मुद्दे सुलझ गए हैं।
उन्होंने कहा,‘‘वर्ष 2019 से अब तक हमने पूर्वोत्तर में 12 महत्वपूर्ण समझौते किये हैं।’’
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार की यह परंपरा रही है कि हम अपने द्वारा किए गए समझौतों को लागू करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। मैं ईएनपीओ के प्रतिनिधियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि केंद्र पूर्वी नगालैंड के विकास के लिए भरपूर सहायता प्रदान करेगा और अपनी जिम्मेदारी भी निभाएगा।’’
उन्होंने कहा कि नगालैंड और केंद्र सरकार को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आपके प्रतिष्ठान के लिए प्रारंभिक खर्च केंद्रीय गृह मंत्रालय वहन करेगा।
मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि यह समझौता ‘‘आपसी विश्वास को दर्शाता है, पूर्वी नगालैंड और पूरे राज्य की आकांक्षाओं को पूरा करता है तथा विकास को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास करता है।’’
राज्य के छह पूर्वी जिलों में फैली आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च संस्था ईएनपीओ दशकों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए 2010 से ही एक अलग राज्य की मांग कर रही है।
बाद में इसने ‘फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए)’ ढांचे के तहत कुछ हद तक स्वायत्तता के लिए केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। भाषा संतोष जोहेब
जोहेब
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
