नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के दूसरे चरण के लिए काटे जाने वाले 1,039 पेड़ों के बदले क्षतिपूर्ति पौधारोपण के लिए मुंबई या आसपास के किसी स्थान पर 24 एकड़ वैकल्पिक भूमि खोजने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने 17 नवंबर, 2025 को बीएमसी के वृक्ष प्राधिकरण को लिंक रोड परियोजना के दूसरे चरण के लिए तत्काल आधार पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के लिए कहा था।
अदालत ने हालांकि परियोजना प्रस्तावक, बीएमसी को क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के उपायों का “पूरी तरह से” पालन करने और इसे आठ सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को बीएमसी और अन्य अधिकारियों ने आग्रह किया कि मुंबई के संजय गांधी पार्क के भीतर चिह्नित कुल 27.5 एकड़ भूमि में से केवल तीन एकड़ भूमि का उपयोग क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए किया जा सकता है।
बीएमसी ने क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए पनवेल के निकट शेष 24 एकड़ भूमि की पहचान करने और उसे चिह्नित करने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया।
प्रस्तुत दलीलों पर ध्यान देते हुए, पीठ ने बीएमसी आयुक्त को दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें उस भूमि का खुलासा किया जाए और साथ ही उस सटीक स्थान का भी उल्लेख किया जाए, जहां नगर निकाय क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण करना चाहता है।
पीठ ने नगर निकाय से भूमि की पहचान और वृक्षारोपण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करने को कहा।
इसके अलावा, बीएमसी को 31 मार्च को दूसरा और 22 मई को तीसरा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया, जिसमें इस मुद्दे पर हुई प्रगति का विवरण दिया जाएगा। नगर निकाय को इस संबंध में उठाए गए कदमों के वीडियो भी प्रस्तुत करने होंगे।
प्रधान न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी अधिकारी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और यह राशि केवल दोषी अधिकारियों से ही वसूल की जाएगी।
अदालत ने इस मामले पर आगे विचार करने के लिए आठ अप्रैल की तारीख तय की है।
भाषा प्रशांत सुरेश
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