नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि न्याय मिलना लोकतांत्रिक शासन की बुनियाद है और यह एक न्यायसंगत व समानता पर आधारित समाज की मुख्य धुरी के रूप में काम करता है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंह और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने यह भी कहा कि मध्यस्थता कार्यवाही का सही तरह से चलना विवाद के समाधान के लिए बहुत जरूरी है।
पीठ ने कहा कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 29ए(5) के तहत मध्यस्थ का कार्यकाल बढ़ाने के लिए दायर आवेदन, धारा 29ए(1) और (3) के तहत निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी स्वीकार किया जा सकता है।
अधिनियम की धारा 29ए मध्यस्थ के लिए समयसीमा से संबंधित है।
पीठ ने एक कानूनी प्रश्न पर विचार किया कि क्या कोई अदालत अधिनियम की धारा 29ए(5) के तहत मध्यस्थ का कार्यकाल बढ़ाने के लिए आवेदन स्वीकार कर सकती है।
इसने जनवरी 2025 के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ की गई अपील पर अपने निर्णय में कहा, “न्याय मिलना लोकतांत्रिक शासन की बुनियाद है और यह एक न्यायसंगत व समानता पर आधारित समाज की मुख्य धुरी के रूप में काम करता है।”
भाषा जोहेब नेत्रपाल
नेत्रपाल
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