नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पिकेलबॉल संघ (आईपीए) को इस खेल के राष्ट्रीय महासंघ के तौर पर मान्यता देने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया है।
केंद्रीय खेल मंत्रालय के फैसले को चुनौती देने वाली अखिल भारतीय पिकेलबॉल संघ (एआईपीएल) की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि अदालत अपने मामलों के विशेषज्ञों द्वारा लिए गए फैसले में दखल देने की इच्छुक नहीं है।
दो फरवरी को दिए गए फैसले में न्यायमूर्ति ने कहा कि ऐसे मामलों में अपील पर सुनवाई अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि मौजूदा मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि भारतीय पिकेलबॉल संघ को मान्यता देना साफ तौर पर मनमाना था या उसमें कोई स्पष्ट अनुचितता थी।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला, ‘‘इन परिस्थितियों में इस अदालत को मौजूदा याचिका में कोई दम नहीं दिखता इसलिए इसे खारिज किया जाता है।’’
आईपीए को 25 अप्रैल 2025 को मान्यता दी गई थी जिससे यह खेल मंत्रालय से वित्तीय अनुदान के लिए योग्य हो गया और इसे राष्ट्रीय स्तर पर खेल का प्रशासन करने, बढ़ावा देने और विकसित करने की स्वायत्तता मिली।
अपनी याचिका में एआईपीएल ने आरोप लगाया कि वह 2008 से अस्तित्व में है और भारत में खेल को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है और विकसित कर रहा है लेकिन खेल मंत्रालय ने खेल संहिता का उल्लंघन करते हुए 138 दिन पुराने संगठन को मान्यता दे दी।
खेल मंत्रालय ने आईपीए को ‘मान्यता के लिए आवेदन करते समय तीन साल के पहले के अस्तित्व’ और ‘राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इकाइयों से संबद्ध 50 प्रतिशत जिला इकाइयों’ की शर्तों से छूट दी थी।
अदालत ने एआईपीए की दलीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि खेल संहिता के प्रावधानों में कुछ भी गलत नहीं था जो मंत्रालय को कुछ स्थितियों में छूट देने में सक्षम बनाता है।
भाषा सुधीर आनन्द
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