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Tuesday, 3 February, 2026
होमदेशदोस्त जो आलोचक बन गए और दो वकील: वह 'हिट लिस्ट' जिसकी वजह से अमृतपाल अब भी जेल में है

दोस्त जो आलोचक बन गए और दो वकील: वह ‘हिट लिस्ट’ जिसकी वजह से अमृतपाल अब भी जेल में है

खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद अमृतपाल को अप्रैल 2023 में पंजाब पुलिस ने NSA के तहत गिरफ्तार किया था. वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं.

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चंडीगढ़: अदालत में दी गई एक दलील से खुलासा हुआ है कि पंजाब सरकार ने पिछले साल अप्रैल में खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत हिरासत में रखने के लिए एक ‘हिट लिस्ट’ का हवाला दिया था. यह ‘हिट लिस्ट’ कथित तौर पर अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने तैयार की थी.

अमृतपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर.एस. चीमा ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने इस ‘हिट लिस्ट’ को पढ़कर सुनाया. यह सुनवाई कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल द्वारा एनएसए के तहत तीसरी बार की गई अपनी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर दोबारा शुरू हुई थी.

चीमा ने दलील दी कि अमृतपाल का इस ‘हिट लिस्ट’ से कोई लेना-देना नहीं है.

चीमा के मुताबिक, इस ‘हिट लिस्ट’ में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें धार्मिक उपदेशक, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं. इनमें से अधिकतर लोग पहले अमृतपाल के उभार में अहम भूमिका निभा चुके थे, लेकिन अब माना जा रहा है कि वे उसके खिलाफ हो गए हैं. अमृतपाल को पंजाब पुलिस ने अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया था.

‘हिट लिस्ट’ में सिख कार्यकर्ता सुखजीत सिंह खोसे, सुखराज सिंह, विक्रमजीत सिंह उर्फ भगत सिंह दोआबी, बख्शीश सिंह, प्रीतपाल सिंह बरगाड़ी, पालविंदर सिंह तलवाड़ा, कगप्रीत सिंह, हुस्सनप्रीत सिंह, मान सिंह अकाली, हरजोत सिंह, सुखप्रीत सिंह और सुखवंत सिंह बराड़ के नाम शामिल हैं.

चीमा ने दो वकीलों परमिंदर सिंह विग और सिमरनजीत सिंह के नाम भी गिनाए, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि वे भी ‘हिट लिस्ट’ में हैं.

चीमा ने मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की बेंच से कहा, “यह दावा किया गया है कि इसे डब्ल्यूपीडी [वारिस पंजाब दे] के समर्थकों ने तैयार किया है, जो कोई भी हो सकता है.” इस मामले की सुनवाई मंगलवार, 3 फरवरी को जारी रहेगी.

17 अप्रैल 2025 को अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट ने अमृतपाल की लगातार तीसरे साल हिरासत का आदेश देने के लिए इस ‘हिट लिस्ट’ को आधार बनाया था. एनएसए के तहत उसकी पिछली हिरासत अवधि, जिसे 12 महीने से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता, पिछले साल अप्रैल में खत्म हो गई थी.

अमृतसर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी हिरासत के आधार में कहा गया, “उपरोक्त ‘हिट लिस्ट’, जिसके मुख्य लाभार्थी आप अमृतपाल सिंह हैं, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव के लिए अपने आप में एक स्पष्ट और गंभीर खतरा है.”

खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद अमृतपाल को पंजाब पुलिस ने अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया था.

हरि नौ की हत्या और ADGP का नोट

हिरासत के आधार के साथ एडीजीपी (इंटेलिजेंस) का 12 अक्टूबर 2024 का एक पत्र भी लिंक्ड था. यह “गोपनीय” पत्र कट्टरपंथी कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह हरि नौ की हत्या के ठीक तीन दिन बाद जिला पुलिस प्रमुखों को भेजा गया था.

एडीजीपी के नोट में कहा गया कि हरि नौ का नाम कथित तौर पर वारिस पंजाब दे के ‘समर्थकों’ द्वारा तैयार की गई ‘हिट लिस्ट’ में था, जिसकी अगुवाई अमृतपाल करता है.

अमृतपाल का करीबी सहयोगी और वारिस पंजाब दे के संस्थापक सदस्यों में शामिल हरि नौ को 9 अक्टूबर 2024 को उसके गांव में गुरुद्वारे से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यह घटना हरि नौ द्वारा अमृतपाल के खिलाफ फेसबुक पर आलोचनात्मक पोस्ट डालने के कुछ दिनों बाद हुई थी.

एडीजीपी के पत्र में कहा गया, “वह [हरि नौ] 2015 के बरगाड़ी बेअदबी कांड और कोटकपूरा व बहबल कलां में पुलिस फायरिंग के बाद हुए प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी के लिए जाना जाता था. हालांकि, पिछले साल अमृतपाल सिंह पर NSA लगाए जाने के बाद उसने उससे दूरी बना ली थी और सोशल मीडिया पर WPD के खिलाफ एक वैकल्पिक नैरेटिव को बढ़ावा दे रहा था.”

पत्र में आगे कहा गया, “यह भी विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि डब्ल्यूपीडी समूह के समर्थकों ने 15 लोगों की एक सूची तैयार की है, जिनमें से गुरप्रीत सिंह हरि नौ की हत्या हो चुकी है और समूह आने वाले दिनों में बाकी लोगों की हत्या की योजना बना रहा है.”

पत्र के साथ एक ‘हिट लिस्ट’ भी संलग्न थी, जिसके बारे में कहा गया कि वारिस पंजाब दे के “सहयोगी, गैंगस्टर या अन्य असामाजिक तत्व” इन लोगों को निशाना बना सकते हैं. एडीजीपी के पत्र में पुलिस अधिकारियों को सलाह दी गई कि वे “कानून व्यवस्था के लिए उचित और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करें और सभी जरूरी निवारक व एहतियाती कदम उठाएं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और कानून व्यवस्था, शांति और कानून का शासन बना रहे.”

नवंबर 2024 में पंजाब पुलिस ने हरि नौ की हत्या के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनके बारे में उसने कहा कि वे अर्श दल्ला गैंग के ऑपरेटिव हैं. उसी महीने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि हरि नौ की हत्या अमृतपाल के कहने पर की गई थी और कट्टरपंथी उपदेशक को इस मामले में आरोपी नामजद किया गया है.

चीमा ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में निवारक और दंडात्मक हिरासत के बीच अंतर बताते हुए कहा कि हरि नौ की हत्या के मामले में दाखिल चार्जशीट में कहा गया है कि अमृतपाल को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, जबकि वह “सिटिंग डक” था, यानी पहले से ही हिरासत में था.

चीमा द्वारा खुली अदालत में पढ़ी गई ‘हिट लिस्ट’ पहली बार पिछले साल मई में सोशल मीडिया पर सामने आई थी और इसे वारिस पंजाब दे की ओर से खुली धमकी के तौर पर देखा गया था. अमृतपाल के सहयोगी बलजीत सिंह (‘चाचा बघेल सिंह’) द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई इस ‘हिट लिस्ट’ में 15 लोगों के पते, फोन नंबर और उन्हें सूची में शामिल करने के कारण दिए गए थे. हालांकि, बलजीत ने अपनी फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि उसने यह ‘हिट लिस्ट’ तैयार नहीं की थी और यह एक आधिकारिक दस्तावेज का हिस्सा थी.

उसने दावा किया कि उसने इसे सिर्फ इसलिए सार्वजनिक किया, ताकि यह दिखाया जा सके कि वारिस पंजाब दे के भीतर बढ़ते मतभेद और अमृतपाल के आलोचकों की ओर से “कल्पित खतरों” की शिकायतों के कारण खडूर साहिब के सांसद को एनएसए के तहत लगातार हिरासत में रखा गया है.

अमृतपाल सिंह कौन हैं

अमृतपाल को मार्च 2022 में वारिस पंजाब दे का नेतृत्व सौंपा गया था. यह फैसला संगठन के संस्थापक दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत के बाद लिया गया था.

पंजाब पुलिस ने अप्रैल 2023 में करीब एक महीने तक चली पकड़ो-पकड़ाई के बाद अमृतपाल और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया था. इसके बाद से अमृतपाल असम की हाई-सिक्योरिटी डिब्रूगढ़ जेल में बंद है. उस पर और उसके साथियों पर कथित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप में एनएसए के तहत हिरासत लगाई गई थी.

जेल में रहते हुए अमृतपाल 2024 में खडूर साहिब से लोकसभा सांसद चुना गया. पंजाब से लोकसभा के लिए चुने गए सभी 13 सांसदों में उसकी जीत का अंतर सबसे ज्यादा था.

पिछले साल जनवरी में अमृतपाल के परिवार और समर्थकों ने एक राजनीतिक पार्टी शुरू की थी. इस पार्टी का नाम शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) रखा गया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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