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Monday, 2 March, 2026
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न्यायालय पेटेंट से जुड़े विवादों में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की शक्तियों को लेकर सुनवाई करेगा

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नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के एक फैसले के कुछ हिस्सों पर रोक लगाते हुए सोमवार को कहा कि वह इस मामले पर सुनवाई करेगा कि क्या भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के पास पेटेंट अधिकारों के इस्तेमाल से जुड़े प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण के आरोपों की जांच करने का अधिकार है।

न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इसी के साथ एनसीएलएटी के फैसले के उस हिस्से के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिनमें कहा गया था कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 वहां लागू नहीं होता, जहां प्रभुत्व के दुरुपयोग के दावे पेटेंट अधिकारों के उपयोग पर आधारित हों और ऐसे विवाद केवल पेटेंट अधिनियम, 1970 के दायरे में आते हैं।

उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अपील और अंतरिम रोक पर उसका विचार क्षेत्राधिकार के प्रश्न तक ही सीमित रहेगा और वह अंतर्निहित प्रतिस्पर्धा विवाद के गुण-दोषों तक विचार नहीं करेगी।

विवाद एनसीएलएटी के उस आदेश से उत्पन्न हुआ है, जिसमें सीसीआई द्वारा 2022 में स्विस दवा कंपनी विफोर इंटरनेशनल एजी के खिलाफ उसकी पेटेंट दवा फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) से संबंधित शिकायत को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा गया था।

सीसीआई ने हालांकि गुण-दोष के आधार पर शिकायत को खारिज किया था, लेकिन एनसीएलएटी ने एक कदम आगे बढ़कर कहा कि नियामक के पास मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र ही नहीं है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण ने दलील दी कि पेटेंट अधिनियम विशेष कानून होते हैं और पेटेंट अधिकारों से संबंधित मामलों में प्रतिस्पर्धा अधिनियम से उन्हें ऊपर माना जाता है।

एनसीएलएटी ने अपने फैसले के समर्थन में प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3(5) का हवाला दिया, जो बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा के लिए लगाई गई उचित शर्तों की सुरक्षा करता है।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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