नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तलब किये जाने के बाद मणिपुर के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायक राष्ट्रीय राजधानी पहुंच गए हैं और माना जा रहा है कि दिल्ली प्रवास के दौरान पूर्वोत्तर राज्य में लोकप्रिय सरकार गठन की संभावनाओं पर चर्चा होगी जहां राष्ट्रपति शासन की अब तक की कानूनी मियाद अगले सप्ताह पूरी हो रही है।
सूत्रों ने बताया कि विधायकों के सोमवार शाम को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक में शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें मणिपुर की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक मणिपुर के करीब 20 विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंचे जबकि बाकी के विधायक भाजपा नेतृत्व के निर्देश पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। भाजपा नेतृत्व से उम्मीद की जा रही है कि वह अगले कुछ दिनों में यह फैसला लेगा कि मणिपुर में पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार का गठन करना है या नहीं।
मणिपुर के विधायकों की भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक ऐसे समय हो रही है जब राष्ट्रपति शासन के दूसरे कार्यकाल की समाप्ति कुछ दिन में होने वाली है। पूर्वोत्तर के इस राज्य में पहली बार 13 फरवरी, 2025 को मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। अगस्त 2025 में इसे और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।
मणिपुर के जो नेता दिल्ली आए है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, मौजूदा समय में स्थगित विधानसभा के अध्यक्ष सत्यब्रता सिंह और पूर्व मंत्री वाई खेमचंद सिंह शामिल हैं। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी भी राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले कुछ महीनों में अपने मेइती और कुकी विधायकों, सहयोगी दलों एनपीएफ और एनपीपी और कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ अलग-अलग कई बैठकें कीं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए राजनीतिक स्थिति अनुकूल है।
उन्होंने बताया कि 14 दिसंबर, 2025 को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष और पार्टी के पूर्वोत्तर मामलों के समन्वयक संबित पात्रा ने दिल्ली में एक ही छत के नीचे मेइती और कुकी समुदायों से आने वाले भाजपा विधायकों से मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक इस वार्ता की प्रगति में मुख्य बाधा भाजपा के कुकी विधायकों की भावी सरकार में भाग लेने की प्रतिबद्धता देने में कथित असमर्थता थी, जो स्पष्ट रूप से सामुदायिक दबाव के कारण थी।
उन्होंने बताया कि कुकी समुदाय केंद्र शासित प्रदेश और विधायिका की अपनी मांग पर केंद्रीय नेतृत्व से ठोस प्रतिबद्धता चाहता है।
मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में इस समय भाजपा के 37 विधायक हैं। भाजपा ने 2022 के चुनाव में 32 सीट हासिल की थी लेकिन बाद में जनता दल यूनाइटेड के छह विधायकों में से पांच ने उसका दामन थाम लिया। इसी के साथ सदन में भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर 37 हो गई।
इसके अलावा सदन में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के छह, नगा पीपुल्स फ्रंट के पांच, कांग्रेस के पांच, कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) के दो, जनता दल (यूनाइटेड) का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट निवर्तमान विधायक के निधन से खाली है।
सूत्रों ने बताया कि यदि आने वाले हफ्तों में नयी सरकार का गठन नहीं होता तो कानूनी बाध्यता के मद्देनजर राष्ट्रपति शासन के विस्तार के लिए संसद के दोनों सदनों में चल रहे बजट सत्र के पहले हिस्सें में भी प्रस्ताव पारित करना होगा।
भाषा धीरज नरेश
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