scorecardresearch
Monday, 2 February, 2026
होमदेशमणिपुर में राष्ट्रपति शासन के आखिरी दिन, संभावित सरकार गठन को लेकर एनडीए विधायक दिल्ली पहुंचे

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के आखिरी दिन, संभावित सरकार गठन को लेकर एनडीए विधायक दिल्ली पहुंचे

मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास बहुमत है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले कुछ महीनों में पार्टी विधायकों और सहयोगी दल एनपीपी और एनपीएफ के साथ कई दौर की बैठकें की हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म होने में अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य के सभी एनडीए विधायकों को, जिनमें मैतेई, कुकी और नागा समुदाय के विधायक शामिल हैं, दिल्ली बुलाया है. इसका मकसद ज़मीनी हालात पर चर्चा करना और राज्य में फिर से सरकार बनाने की संभावना तलाशना है.

पार्टी के एक नेता ने, नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि यह बैठक सोमवार शाम को हो सकती है.

पिछले साल फरवरी में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. यह फैसला मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता के चलते लिया गया था. यह हिंसा मुख्य रूप से हिंदू मैतेई और आदिवासी ईसाई कुकी समुदायों के बीच हुई थी. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्य विधानसभा को निलंबित स्थिति में रखा गया था.

60-सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास बहुमत है. जनवरी में नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक एन. कायिसी की मौत के बाद इस समय विधानसभा में 59 विधायक हैं. बीजेपी के पास कुल 32 सीटें हैं, जिनमें कुकी-जो समुदाय के सात विधायक भी शामिल हैं.

2022 के विधानसभा चुनाव के बाद जनता दल (यूनाइटेड) के पांच विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिससे पार्टी की प्रभावी संख्या 37 हो गई थी.

बाकी विधायकों में कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी के छह विधायक शामिल हैं, जो पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी थी. नवंबर 2024 में एनपीपी ने संघर्ष के बाद एन. बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. हालांकि, पार्टी केंद्र में बीजेपी को समर्थन देना जारी रखे हुए है.

बीजेपी की एक और पूर्व सहयोगी पार्टी, कुकी पीपुल्स अलायंस, के दो विधायक हैं. इसके अलावा, नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के पांच विधायक, तीन निर्दलीय, कांग्रेस के पांच विधायक और जेडी(यू) का एक विधायक भी है.

बीजेपी के एक विधायक ने, नाम न छापने की शर्त पर, बताया कि एनडीए के 16 विधायक, जिनमें एनपीपी और एनपीएफ से एक-एक विधायक शामिल हैं—रविवार रात दिल्ली पहुंचे. नेता ने कहा, “बाकी विधायक सोमवार सुबह पहुंचेंगे.”

दिल्ली पहुंचने वालों में मणिपुर विधानसभा के स्पीकर थोकचोम सत्यब्रत सिंह, पूर्व राज्य मंत्री वाई. खेमचंद सिंह, एनपीपी के थोकचोम शांति सिंह, एनपीएफ के आवांगबो न्यूमै और अन्य शामिल हैं.

पिछले चार महीनों में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के विधायकों, जिसमें कुकी-जो समुदाय के विधायक भी शामिल हैं और सहयोगी दलों एनपीपी और एनपीएफ के साथ कई दौर की बैठकें की हैं. इन बैठकों का उद्देश्य यह समझना रहा है कि क्या राज्य में सरकार गठन के लिए हालात अनुकूल हैं.

केंद्र सरकार के लिए जनप्रतिनिधियों की सरकार बहाल करने में एक बड़ी चुनौती बीजेपी के सात कुकी-जो विधायकों का सख्त रुख है. इन विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व को साफ तौर पर कहा है कि वे तभी सरकार गठन में शामिल होंगे, जब उन्हें लिखित आश्वासन दिया जाएगा कि मार्च 2027 में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले उनकी विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश की मांग पूरी की जाएगी.

मणिपुर में हिंसा में अब तक 250 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और दोनों समुदायों के 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं. हालांकि हालात धीरे-धीरे शांत हुए हैं, लेकिन बीच-बीच में होने वाली घटनाएं अस्थिरता को बढ़ा रही हैं.

जनवरी में एक मैतेई व्यक्ति, जो चुराचांदपुर में अपनी कुकी साथी से मिलने गया था, संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा मार दिया गया. पिछले महीने कांगपोकपी जिले के एक गांव में नागा भूमिगत संगठन के एक गुट द्वारा कुछ कुकी-जो घरों को जलाए जाने के बाद भी तनाव बढ़ गया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: 1962 में रेजांग ला की लड़ाई भारत के सबसे बहादुर सैनिकों ने लड़ी, लेकिन इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं


 

share & View comments