scorecardresearch
Monday, 2 February, 2026
होमदेशमप्र के व्यापार संगठनों ने बजट की सराहना की, सोयाबीन उत्पादकों का फसल पर अधिक तवज्जो देने पर जोर

मप्र के व्यापार संगठनों ने बजट की सराहना की, सोयाबीन उत्पादकों का फसल पर अधिक तवज्जो देने पर जोर

Text Size:

इंदौर/भोपाल, एक फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के वंचित वर्गों के प्रतिनिधियों सहित उद्योग और व्यापार संगठनों ने रविवार को केंद्रीय बजट को व्यावहारिक बताते हुए कहा कि इसके प्रावधानों से आर्थिक और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, सोयाबीन उत्पादकों ने आह्वान किया कि इस फसल को लेकर एक विशेष नीति बने क्योंकि मध्यप्रदेश भारत का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है।

उद्योग निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की राज्य परिषद के अध्यक्ष सिद्धार्थ सेठी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), रोजगार सृजन और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित बजट प्रस्तावों की सराहना की।

उन्होंने कहा, ‘‘ऋण तक आसान पहुंच और बेहतर सहायता प्रणालियों से खास तौर पर मध्यप्रदेश में एमएसएमई के पारिस्थितिक तंत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा।’’

एमएसएमई क्षेत्र के संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, मध्यप्रदेश’ के अध्यक्ष योगेश मेहता ने कहा कि बजट में विनिर्माण क्षेत्र और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, ”यह बजट भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगा।”

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेशचंद्र गुप्ता ने कहा कि बजट विनिर्माण एवं निर्यात को बढ़ावा देने वाला है और इससे व्यापारियों को भी फायदा होगा।

प्रसंस्करणकर्ताओं के संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अध्यक्ष डेविश जैन ने कहा कि बजट कृषि विकास और खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है।

जैन ने सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र के लिए अधिक लक्षित और स्पष्ट नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया और कहा, ‘अगर बजट में सोयाबीन के लिए ठोस और विशिष्ट उपायों की घोषणा की जाती, तो इसका प्रभाव ज्यादा मजबूत हो सकता था।’’

स्टार्टअप के लिए काम करने वाले संगठन ‘इनवेस्ट इंदौर’ के सचिव सावन लड्ढा ने कहा कि बजट, सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्ट-अप पारिस्थितिक तंत्र के लिए स्थिरता और दीर्घकालिक सोच का संकेत देता है।

उन्होंने कहा, ”बजट में डिजिटल बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और स्टार्टअप के लिए कारोबारी सुगमता पर दिया गया विशेष जोर सराहनीय है। यदि बजट के प्रस्तावों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो छोटे शहरों में भी प्रौद्योगिकी क्षेत्र और स्टार्टअप की वृद्धि को नयी गति मिलेगी।”

दलित इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डीआईसीसीआई) के मध्यप्रदेश के अध्यक्ष अनिल सिरवैया ने बजट को दलितों के अनुकूल बताया।

उन्होंने कहा, ‘अगर केंद्रीय बजट को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के संदर्भ में देखा जाए तो यह विशिष्ट घोषणाओं के बजाय संरचनात्मक विकास और अवसर सृजन पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है।’

सिरवैया ने 10,000 करोड़ रुपये के एमएसएमई विकास कोष, आत्मनिर्भर भारत कोष के लिए अतिरिक्त पूंजी, टीआरईडीएस के माध्यम से तरलता में वृद्धि और ‘कॉर्पोरेट मित्र’ केंद्रों की स्थापना जैसे प्रावधानों को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि ये प्रावधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों सहित सूक्ष्म और लघु उद्यमों को नई गति प्रदान करेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि बजट की सफलता प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भोपाल के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने बजट का स्वागत किया लेकिन जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण सुविधाओं को बढ़ाने और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने की घोषणा एक सकारात्मक कदम है और इससे व्यावसायिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।’

उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स, शहरी बुनियादी ढांचे और परिवहन से संबंधित प्रावधानों से भोपाल जैसे शहरों में व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।

हालांकि, शर्मा ने कहा कि जीएसटी प्रक्रिया के वास्तविक सरलीकरण और अनावश्यक नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई से राहत की व्यापारियों की प्रमुख मांग को बजट में किसी ठोस घोषणा के माध्यम से संबोधित नहीं किया गया था।

यूथ इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र विश्वकर्मा ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रामीण केंद्रित है और इससे कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए 2.73 लाख करोड़ रुपये और कृषि विकास के लिए 1.62 लाख करोड़ रुपये के आवंटन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि इससे किसानों की स्थिति में सुधार होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हालांकि, कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण बाजारों के लिए एक विशेष बजट की आवश्यकता थी, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया है।

विश्वकर्मा ने कहा कि बजट गरीबों, युवाओं, महिलाओं और किसानों पर केंद्रित है, लेकिन उन्होंने शिक्षा और रोजगार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाया गया है।

भाषा ब्रजेन्द्र अमित

अमित

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments