जबलपुर (मध्यप्रदेश), एक फरवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जबलपुर की एक विशेष अदालत के आदेश के बाद करीब 45 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति केनरा बैंक के पक्ष में बहाल करने की व्यवस्था की। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान में कहा गया कि ईडी ने पाया कि सुश्री जगदम्बा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुष्पेंद्र सिंह और अन्य ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके कई वाहन ऋण लिये, लेकिन वाहनों की डिलीवरी नहीं की।
बयान में कहा गया है कि ऋण राशि का कथित तौर पर इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ और बकाया चुकाने के लिए किया गया। बयान के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर झूठे वाहन ऋण के माध्यम से ऋणदाताओं के साथ 18.32 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी।
बयान में कहा गया है कि ईडी ने सिंह, केनरा बैंक के अधिकारियों और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत धनशोधन का एक मामला दर्ज किया। पीएमएलए प्रावधानों के तहत ईडी ने सिंह सहित आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया।
बयान में कहा गया है कि जबलपुर में पीएमएलए की विशेष अदालत ने मार्च 2024 में अभियोजन की शिकायत दर्ज होने के बाद आरोप तय किए थे।
केनरा बैंक ने 9 जनवरी, 2025 को एक आवेदन दायर किया, जिसमें पीएमएलए की धारा 8(8) के तहत कुर्क की गई संपत्तियों की बहाली की मांग की गई।
बयान के अनुसार, सभी पक्षों को सुनने के बाद, विशेष अदालत (पीएमएलए) के न्यायाधीश इरसाद अहमद ने 29 जनवरी, 2026 को एक आदेश पारित किया, जिसमें पीड़ित बैंक के पक्ष में 45 करोड़ रुपये के वर्तमान बाजार मूल्य वाली संपत्तियों की बहाली का निर्देश दिया गया।
भाषा सं ब्रजेन्द्र अमित
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