कोलकाता, एक फरवरी (भाषा) डीआरडीओ के संयुक्त निदेशक बिनॉय कुमार दास ने रविवार को कहा कि अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों के डिजाइन और विकास में लगे प्रमुख सरकारी अनुसंधान संगठन के लिए बजट कभी भी बाधा नहीं रहा है।
दास ने कहा कि रक्षा अनुसंधान और उत्पादन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से हमेशा से भरपूर सहयोग मिलता रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने हमेशा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को बिना शर्त सहयोग दिया है और बजट हमारे लिए कभी बाधा नहीं रहा है।’’
दास के मुताबिक, डीआरडीओ से अगली पीढ़ी की ऐसी तकनीक पर काम करने के लिए कहा गया है, जो दुनिया में किसी के पास नहीं है।
उन्होंने यहां साइंस सिटी सभागार में कहा, ‘‘हमें ऐसे उपकरणों पर काम करना होगा, जिनका हमारे सशस्त्र बल सपना देख रहे हैं। हम ऐसे उपकरणों के आयात का इंतजार नहीं कर सकते, क्योंकि आज की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और युद्ध के परिदृश्यों में समीकरण बदल गए हैं।’’
दास को विज्ञान और रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान के लिए ‘जेआईएस महा सम्मान’ पुरस्कार से नवाजा गया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बजट हमें उन प्रणालियों को साकार करने और सशक्त बनाने में मदद करेगा, जिन्हें हम विकसित करते हैं…। यह निर्यात के माध्यम से एक आर्थिक महाशक्ति बनने में हमारे देश के लिए सहायक होगा।’’
दास ने कहा कि कुछ दशक पहले भारत को रक्षा प्रौद्योगिकियों के आयात से वंचित रखा गया था, और ‘‘आज हम गर्व से आयात से इनकार कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत ने गैलियम नाइट्राइड (जीएएन) प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करके सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलताएं प्राप्त की हैं और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में पूर्णतः आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में काम हो रहा है।
भाषा आशीष प्रशांत पारुल
प्रशांत
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
