कोल्लम (केरल), एक फरवरी (भाषा) केरल के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल ने रविवार को कहा कि केंद्रीय बजट भारतीय अर्थव्यवस्था में ठहराव का संकेत देता है और इससे स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार जरूरी फंड की कमी से जूझ रही है।
बजट के बाद बालगोपाल ने संवाददाताओं से कहा कि कर प्रस्ताव घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को सुविधाजनक बनाने की कोशिश को दिखाते हैं।
उन्होंने कहा, “बजट भाषण का बड़ा हिस्सा करों को लेकर था, लेकिन यदि गहराई से देखा जाए तो कराधान के मोर्चे पर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है।”
बालगोपाल ने आरोप लगाया कि कर संबंधी सिफारिशें देश के हित में नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की शुल्क (टैरिफ) नीतियों से बढ़े दबावों को ध्यान में रखकर की गई हैं।
उन्होंने कहा, “बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का काम करे।”
बालगोपाल ने कहा, “अक्सर संकट की वजह से बजट के अनुमान पूरे नहीं हो पाते, लेकिन अब भारतीय अर्थव्यवस्था में साफ तौर पर ठहराव दिखाई दे रहा है। बजट में ही साफ दिखाई दे रहा है कि कई क्षेत्रों में खर्च घटा दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य सब्सिडी के आवंटन में कटौती की गई है तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भी इसी तरह की कमी की गई है।
केरल के वित्त मंत्री ने कहा कि केरल की प्रमुख मांगों विझिंजम बंदरगाह के विकास के लिए अतिरिक्त निधि और बंदरगाह से एक समर्पित कार्गो कॉरिडोर पर बजट में कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य की हाई-स्पीड रेल संपर्क की मांग को भी नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि इसी तरह की परियोजनाएं अन्य राज्यों के लिये मंजूर की गई हैं।
उन्होंने कहा, “इस बार कछुआ संरक्षण के लिए एक परियोजना का उल्लेख किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इससे आम लोगों को क्या लाभ होगा।”
भाषा खारी दिलीप
दिलीप
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