नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पिछले साल की जनगणना और उससे जुड़े कार्यों के संशोधित खर्च के मुकाबले लगभग छह गुना अधिक राशि आवंटित की है. वित्त वर्ष 2026-27 के यूनियन बजट में यह आवंटन बढ़ाकर 6,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. जबकि पिछले साल के बजट के संशोधित अनुमान में यह राशि 1,040 करोड़ रुपये थी.
भारत के रजिस्ट्रार जनरल यानी आरजीआई के लिए फंडिंग में यह बड़ी बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब केंद्र सरकार देशव्यापी जनगणना कराने वाली है. इस प्रक्रिया का पहला चरण, जो पहले 2021 में होना था, अब अप्रैल से शुरू होने वाला है.
पहले चरण में करीब 30 लाख गणनाकर्मी और अन्य फील्ड कर्मचारी डेटा और जानकारियों का रिकॉर्ड करेंगे. इसमें इमारतों और घरों की मैपिंग शामिल होगी. इसके जरिए घरों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जैसे पानी और बिजली की आपूर्ति जैसी सुविधाओं की स्थिति, शौचालय, रसोई ईंधन, और टीवी, फोन व वाहन जैसी संपत्तियां.
पहला चरण सितंबर में पूरा होगा. इसके बाद गणनाकर्मी लोगों की गिनती करेंगे और उनके विवरण दर्ज करेंगे. इसमें नाम, उम्र, लिंग, परिवार के मुखिया से संबंध, वैवाहिक स्थिति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, जन्म स्थान और निवास, धर्म, प्रजनन और दिव्यांगता की स्थिति जैसी श्रेणियां शामिल होंगी. आने वाली जनगणना में 1947 में आजादी के बाद पहली बार आबादी की जाति का भी रिकॉर्ड किया जाएगा.
पिछले साल के बजट में आरजीआई और जनगणना अभ्यास के लिए शुरुआत में 574.80 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था. बाद में इसे बढ़ाकर 1,040 करोड़ रुपये कर दिया गया था. ऐसा माना गया कि यह बढ़ोतरी जनगणना से पहले की प्रक्रियाएं शुरू होने के कारण की गई थी.
सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बजट कई क्षेत्रों में भारत की छवि को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत करता है.
पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा बढ़ावा
वित्त मंत्री ने आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए सरकार के प्रस्तावित खर्च को भी बढ़ाया है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, केंद्रीय पुलिस संगठनों और दिल्ली पुलिस के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजटीय आवंटन को पिछले साल के बजट के संशोधित अनुमान की तुलना में करीब 50 प्रतिशत बढ़ाया गया है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस शामिल हैं.
इन श्रेणियों के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए कुल 5,394 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. पिछले साल के संशोधित बजट में यह राशि 3,684 करोड़ रुपये थी. वहीं पिछले साल के बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने इन्हीं मदों के लिए शुरुआत में 4,379 करोड़ रुपये आवंटित किए थे.
एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिकारी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में बढ़ोतरी से प्रशिक्षण के लिए नए केंद्र, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर जैसे आंतरिक सुरक्षा क्षेत्रों में प्रशासनिक इमारतें, और सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से तैयार किया जा सकेगा.
दिल्ली पुलिस के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बजटीय आवंटन भी करीब 50 प्रतिशत बढ़ाया गया है. यह पिछले साल के संशोधित अनुमान के अनुसार 162.51 करोड़ रुपये से बढ़कर अगले वित्त वर्ष के लिए 342.50 करोड़ रुपये हो गया है.
इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम यानी आईसीजेएस के लिए बजटीय आवंटन में भी करीब 50 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई है. यह पिछले साल के बजट में 300 करोड़ रुपये था, जो अगले वित्त वर्ष के लिए बढ़ाकर 550 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
आईसीजेएस एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जिसे आपराधिक न्याय प्रणाली के पांच प्रमुख स्तंभों को जोड़ने के लिए बनाया गया है. इनमें पुलिस यानी सीसीटीएनएस, ई-कोर्ट्स, ई-प्रिज़न्स, फॉरेंसिक और अभियोजन शामिल हैं. इसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच डेटा का सुचारू आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है.
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