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Friday, 6 February, 2026
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विदेशी बाजारों में सुधार, रुपया कमजोर होने से बीते सप्ताह अधिकांश तेल-तिलहन के दाम मजबूत

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नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) विदेशों में खाद्य तेलों के दाम मजबूत होने, रुपये के मूल्य में आई गिरावट के कारण बीते सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजारों में सभी तेल-तिलहनों के दाम मजबूत बने रहे।

बीते सप्ताह सरकार ने आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में भी बदलाव किये हैं। इस बदलाव के तहत कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल का आयात शुल्क मूल्य क्रमश: 14 रुपये और 29 रुपये क्विंटल घटाया गया है जबकि सोयाबीन डीगम का आयात शुल्क मूल्य 20 रुपये क्विंटल बढ़ाया गया है।

सूत्रों ने कहा कि एक फरवरी को केन्द्रीय बजट से पहले तेल-तिलहन कारोबार के संबंध में किसी स्पष्ट दिशानिदेर्शो के अभाव में बाजार का कामकाज सुस्त बना रहा मगर विदेशों में आई तेजी के असर से स्थानीय तेल-तिलहनों के दाम मजबूत हो गये। बजट पेशकशों के बाद सोमवार के बाद बाजार की आगे की दिशा निर्धारित होगी।

उन्होंने कहा कि इस बीच अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया अपने निम्नतम स्तर के करीब मंडरा रहा है। इस वजह से खाद्य तेलों का आयात महंगा हो चला है जो खाद्य तेल कीमतों में तेजी का एक मुख्य कारण है। इसके अलावा नवंबर-दिसंबर में देश में आयातकों द्वारा लागत से नीचे दाम पर सोयाबीन डीगम तेल की बिक्री की जा रही थी। घाटे के इस लंबे कारोबार के बीच सोयाबीन डीगम तेल का आयात जनवरी में कम हुआ और फरवरी के महीने में भी आयात के आर्डर कम हैं। इसके कारण खाद्य तेलों की आपूर्ति की कमी हो रही है। किसान भी नीचे भाव में अपनी उपज बेचने से कतरा रहे हैं जिससे आपूर्ति की स्थिति और संकटमय है। आपूर्ति की इस दिक्कत के कारण भी खाद्य तेलों के दाम मजबूत हुए हैं।

सूत्रों ने बताया कि विदेशों में बाजार मजबूत रहने से बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन के भाव में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि, सरसों की नयी फसल तैयार खड़ी है जिसे देखते हुए आगे सरसों के बाजार की दिशा निर्धारित होगी। लेकिन इतना तय है कि जब तक सरसों के दाम सोयाबीन के बराबर या उससे कम नहीं होंगे, सरसों की खपत नहीं बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि किसान बाजार में सोयाबीन की आवक कम ला रहे हैं। विदेशों में इसके बाजार मजबूत हुए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हुआ है। बाजार में आपूर्ति इतनी कम है कि सोयाबीन प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। जनवरी के महीने में सोयाबीन का आयात कम हुआ है और आयात के ऑर्डर को देखते हुए फरवरी में भी आयात कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। इन परिस्थितियों के बीच सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम बीते सप्ताह मजबूत बंद हुए। दो-तीन साल के बाद इस बार किसानों को सोयाबीन के जो अच्छे दाम मिलें हैं उससे आगे इसकी पैदावार बढ़ सकती है।

सूत्रों ने कहा कि बाजार में कम आपूर्ति और मांग में आई तेजी के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम भी मजबूत बंद हुए।

उन्होंने कहा कि विदेशी बाजारों में तेजी और आयात की कमी की स्थिति के बीच बीते सप्ताह सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम में भी मजबूती दिखी। सोयाबीन तेल के मजबूत होने और विदेशों में सूरजमुखी तेल का दाम लगभग 165 रुपये किलो होने से भी बाकी तेल-तिलहनों के दाम में मजबूती का असर आया है।

सूत्रों ने कहा कि आयातित खाद्य तेलों की मजबूती का असर बिनौला पर भी दिखा और बीते सप्ताह बिनौला तेल कीमतों में भी पर्याप्त मजबूती दिखी।

बीते सप्ताह देश के प्रमुख खाद्य तेल संगठन, एसईए ने बजट से अपनी अपेक्षाओं को सामने रखते हुए सरकार से देश की खाद्य तेल मामले में आयात पर निर्भरता को खतरा बताते हुए, इससे बचने के उपाय किये जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए यह निर्भरता खतरा भी बन सकती है। संगठन ने नेपाल से खाद्य तेलों के शुल्कमुक्त आयात को भी नियंत्रित करने की सरकार से मांग की है।

बीते सप्ताह सरसों दाना 75 रुपये के सुधार के साथ 7,150-7,175 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 14,800 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 10-10 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,475-2,575 रुपये और 2,475-2,620 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 225-225 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 5,725-5,775 रुपये और 5,325-5,375 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 300 रुपये के सुधार के साथ 14,700 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 350 रुपये के सुधार के साथ 14,250 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 300 रुपये के सुधार के साथ 11,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

उन्होंने कहा कि जाड़े में साबुत खाने और अच्छी गुणवत्ता के खाद्य तेल की मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतों में भी सुधार का रुख दिखा। मूंगफली तिलहन 125 रुपये के सुधार के साथ 6,950-7,325 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 350 रुपये के सुधार के साथ 16,850 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 2,685-2,985 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।

बीते समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 300 रुपये के सुधार के साथ 12,050 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 275 रुपये के सुधार के साथ 13,975 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव 275 रुपये के सुधार के साथ 12,875 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

तेजी के आम रुख के बीच, समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल के दाम भी 450 रुपये सुधार के साथ 13,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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