नई दिल्ली: भारत की अंतरिक्ष और एस्ट्रोनॉमी की महत्वाकांक्षाओं को बड़ा बढ़ावा देते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में चार टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की स्थापना और अपग्रेडेशन की घोषणा की.
रविवार को अपने बजट भाषण में सीतारमण ने कहा, “एस्ट्रोफिजिक्स और खगोल विज्ञान को इमर्सिव अनुभवों के जरिए बढ़ावा देने के लिए चार टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं स्थापित की जाएंगी या अपग्रेड की जाएंगी. इनमें नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप, नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप, हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप और कॉसमॉस-2 प्लैनेटेरियम शामिल हैं.”
उन्होंने कहा कि इस घोषणा का मकसद भारत के वैज्ञानिक इंफ्रास्ट्रक्चर और अवलोकन क्षमताओं का विस्तार करना है. इसके साथ ही इन क्षेत्रों में उन्नत शोध और आम लोगों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना भी इसका उद्देश्य है.
बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ने रविवार को एक बयान में कहा कि यह घोषणा भारत में “अगली पीढ़ी के बड़े टेलीस्कोप और खगोल विज्ञान आउटरीच केंद्रों के निर्माण” को बड़ी गति देगी.
कौन सी सुविधाएं बेहतर की जाएंगी
नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप यानी एनएलएसटी एक निर्माणाधीन सुविधा है. यह लद्दाख के मेरक में पैंगोंग झील के पास करीब 4,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
प्रस्तावित 2 मीटर श्रेणी की ऑप्टिकल और नियर-इन्फ्रारेड अवलोकन सुविधा, शुरू होने के बाद देश की सबसे बड़ी ग्राउंड-बेस्ड सोलर टेलीस्कोप होगी. इसे सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों की उत्पत्ति और उनकी गतिशीलता से जुड़े कई अहम वैज्ञानिक सवालों को 0.1 से 0.3 आर्क-सेकंड के स्थानिक रिजॉल्यूशन पर समझने के लिए डिजाइन किया गया है.
एनएलएसटी की वेबसाइट के अनुसार, “यह उपकरण स्पेस-बेस्ड आदित्य मिशन और ग्राउंड-बेस्ड मास्ट टेलीस्कोप, उदयपुर, से होने वाले सौर वायुमंडलीय अवलोकनों को सहयोग और मजबूती देने में सक्षम है.”
इस स्थान का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहां लंबे समय तक साफ और कोरोनाग्राफिक आसमान मिलता है.
सीतारमण के बजट भाषण में जिस दूसरी सुविधा का जिक्र हुआ है, वह है नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप. इस प्रस्तावित सुविधा में 10 से 12 मीटर का सेगमेंटेड प्राइमरी मिरर होगा. इसे 0.3 से 5 माइक्रोमीटर की ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य पर उच्च क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है.
2022 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र में बताया गया था कि इस टेलीस्कोप में रिमोट ऑपरेशन की सुविधा होगी.
हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप और कॉसमॉस-2 प्लैनेटेरियम की क्षमताओं को भी अपग्रेड किया जाएगा.
हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप एक 2 मीटर का ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप है. यह लद्दाख के हानले में स्थित इंडियन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी में है और दुनिया के सबसे ऊंचे वेधशाला स्थलों में से एक है. फिलहाल इसे बेंगलुरु से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स द्वारा रिमोट तरीके से संचालित किया जाता है. यह तारों के विस्फोट, एक्सोप्लैनेट और धूमकेतुओं के अवलोकन के लिए एक अहम सुविधा है, जहां का आसमान अंधेरा और साफ रहता है.
वहीं कॉसमॉस-2 प्लैनेटेरियम देश में विज्ञान शिक्षा और आउटरीच को मजबूत करने की एक प्रस्तावित योजना है. इस परियोजना का उद्देश्य इमर्सिव कंटेंट के जरिए युवा पीढ़ी में विज्ञान को लोकप्रिय बनाना है.
इंडियन स्पेस एसोसिएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए. के. भट्ट, सेवानिवृत्त, ने कहा कि यह घोषणा एस्ट्रोफिजिक्स और खगोल विज्ञान में भारत के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है.
उन्होंने कहा, “ये सभी कदम मिलकर अवलोकन क्षमताओं को बेहतर कर सकते हैं, दीर्घकालिक शोध को संभव बना सकते हैं और इसरो, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत कर सकते हैं. इससे धीरे-धीरे वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान और व्यापक अंतरिक्ष इकोसिस्टम में भारत का योगदान बढ़ेगा.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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