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Sunday, 1 February, 2026
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बजट 2026: भारत को बायोफार्मा हब बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ऐलान

अन्य घोषणाओं में उन्होंने रणनीतिक और भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और शहरों में आर्थिक क्षेत्रों के विकास का भी प्रस्ताव रखा.

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में भारत के बायोफार्मा सेक्टर को मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने ‘बायो फार्मा शक्ति’ कार्यक्रम के तहत अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा है.

वित्त मंत्री ने संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि बायो फार्मा शक्ति कार्यक्रम का मकसद बायोफार्मा और बायोसिमिलर दवाओं के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है. इससे इस सेक्टर में उत्पादन बढ़ेगा और भारत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी.

अन्य घोषणाओं में उन्होंने रणनीतिक और भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और शहरों में आर्थिक क्षेत्रों के विकास का भी प्रस्ताव रखा.

अपने शुरुआती भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, तब से भारत की अर्थव्यवस्था में वित्तीय अनुशासन और लगातार विकास देखने को मिला है. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने असमंजस की जगह कार्रवाई और भाषणों की जगह सुधारों को चुना है. आत्मनिर्भरता को सरकार ने अपना मुख्य लक्ष्य बनाया है.

वित्त मंत्री ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर रही है. इस दौरान वित्तीय अनुशासन, लगातार विकास और नियंत्रित महंगाई देखने को मिली है.” उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में सरकार विकास और समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखेगी.

निर्मला सीतारमण ने आज संसद में लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया. इससे पहले गुरुवार को उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण भी संसद में पेश किया था.

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. यह कठिन वैश्विक हालात के बावजूद मध्यम अवधि में मजबूत आर्थिक क्षमता को दिखाता है.

सर्वे के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत महंगाई दर 1.7 प्रतिशत रही, जो सीपीआई आंकड़ों की शुरुआत के बाद सबसे कम है. इसका कारण खाद्य और ईंधन कीमतों में आई गिरावट बताया गया है. आगे भी महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद है, क्योंकि सप्लाई की स्थिति बेहतर है और जीएसटी दरों में बदलाव का असर धीरे-धीरे दिख रहा है.

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